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मानवता को झकझोर देने वाली कहानी: एटा में एचआईवी पीड़ित मां की मौत, 10 साल के बेटे ने निभाया हर फर्ज़

मानवता को झकझोर देने वाली एटा की घटना, जहां एचआईवी संक्रमित मां की मौत के बाद 10 साल के बेटे ने अकेले अंतिम संस्कार की प्रक्रिया निभाई, पुलिस ने बढ़ाया मदद का हाथ।

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
एटा (उत्तर प्रदेश) | 16 जनवरी 2026

मानवता : सामाजिक डर और उपेक्षा के बीच एक मासूम ने अकेले किया मां का अंतिम संस्कार, पुलिस बनी सहारा

मानवता

मानवता को शर्मसार करने वाली यह घटना उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले से सामने आई है, जहां एचआईवी संक्रमित एक महिला की मौत के बाद उसका 10 वर्षीय बेटा ही उसकी आख़िरी उम्मीद और सहारा बना। इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज में महिला की मौत हो गई, लेकिन संक्रमण के डर से न तो कोई रिश्तेदार सामने आया और न ही गांव का कोई व्यक्ति। मां की मौत के बाद बच्चा पूरी तरह अकेला पड़ गया, फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और सारी औपचारिकताएं खुद निभाईं।

पुलिस के अनुसार, जलेसर सर्किल के जॉयथरा थाना क्षेत्र के नगला धीरज गांव की रहने वाली नीलम को गंभीर बीमारी की हालत में एटा के वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। मानवता की कसौटी तब सामने आई जब इलाज के दौरान नीलम की मौत हो गई और अस्पताल में उस समय केवल उसका 10 साल का बेटा मौजूद था। रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने एचआईवी संक्रमण के भय से दूरी बना ली। बच्चे के पास न किसी का फोन नंबर था, न कोई मदद करने वाला। मजबूरी में उसी मासूम ने मां के शव को पोस्टमार्टम के लिए पहुंचाया और जरूरी कागज़ी कार्रवाई करवाई।

जॉयथरा थाना प्रभारी के मुताबिक, नीलम करीब एक महीने से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। इलाज के लिए वह कुछ समय अपने मायके फर्रुखाबाद में थीं, लेकिन हालत बिगड़ने पर पांच दिन पहले अपने गांव लौटीं, जहां से उन्हें एटा मेडिकल कॉलेज लाया गया। बुधवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई।

बच्चे ने पुलिस और मीडिया को बताया कि उसकी 15 साल की एक बहन फर्रुखाबाद ज़िले के नारायणपुर गांव में रहती है, लेकिन उसके पास किसी रिश्तेदार का संपर्क नंबर नहीं था। इसलिए वह किसी को सूचना भी नहीं दे सका। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर उसने बताया कि मां के शव को वहां तक वही लेकर आया, क्योंकि मदद के लिए कोई और मौजूद नहीं था।

पुलिस ने बताया कि नीलम के पति सुरेंद्र की करीब आठ महीने पहले मौत हो चुकी थी। वह भी एचआईवी संक्रमित थे। नीलम स्वयं भी इसी बीमारी से पीड़ित थीं। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुष्टि की कि पति-पत्नी दोनों एचआईवी पॉजिटिव थे।

पुलिस का कहना है कि परिवार के सदस्यों को सूचना दी गई है और अंतिम संस्कार की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। परिवार और अन्य लोगों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया जाएगा। माता-पिता दोनों को खो चुका यह बच्चा अब अनाथ हो चुका है। मानवता के नाते पुलिस ने आगे आकर उसकी मदद का भरोसा दिया है।

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