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बुलडोज़र अभियान के तहत हावड़ा स्टेशन के बाहर अवैध दुकानों पर कार्रवाई, 150 से अधिक स्टॉल हटाए गए

बुलडोज़र अभियान के तहत हावड़ा स्टेशन के बाहर रेलवे और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 150 से अधिक कथित अवैध दुकानों और हॉकर्स स्टॉल को हटाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में रातभर चली कार्रवाई पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है।

 
Qalam Times News Network
हावड़ा | 17 मई 2026
बुलडोज़र अभियान के तहत शनिवार रात हावड़ा स्टेशन परिसर के बाहर रेलवे प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चलाई। स्टेशन के सामने फुटपाथ और सड़क किनारे बने अस्थायी हॉकर्स स्टॉल, डाले और कथित अवैध दुकानों को बुलडोज़र चलाकर हटाया गया। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
रेलवे सूत्रों के अनुसार हावड़ा स्टेशन के बाहर लंबे समय से बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें और हॉकर्स कब्जा जमाए हुए थे, जिसके कारण यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और यातायात जाम की समस्या लगातार बढ़ती जा रही थी।

रात में चला अभियान, एक के बाद एक तोड़ी गई दुकानें

शनिवार देर रात जैसे ही स्टेशन परिसर के बाहर भीड़ कुछ कम हुई, रेलवे प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। बुलडोज़र की मदद से फुटपाथ पर बनी एक के बाद एक दुकानों को तोड़ा गया। बताया जा रहा है कि इस अभियान में 150 से अधिक अस्थायी दुकानों और स्टॉलों को हटाया गया।

बुलडोज़र
कार्रवाई के दौरान कुछ जगहों पर हॉकर्स और पुलिस के बीच बहस भी हुई। पुलिस लगातार लोगों को फुटपाथ खाली करने के निर्देश देती रही। स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि उन्हें उसी दिन नोटिस दिया गया और कुछ घंटों बाद ही बुलडोज़र चलाकर सब कुछ तोड़ दिया गया। कई हॉकर्स ने दावा किया कि उन्हें दुकान हटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

यात्रियों की शिकायतों के बाद लिया गया फैसला

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन परिसर को अधिक साफ, व्यवस्थित और यात्री अनुकूल बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। हावड़ा स्टेशन पूर्वी भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है, जहां रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है।
यात्रियों का एक बड़ा वर्ग लंबे समय से शिकायत कर रहा था कि स्टेशन के बाहर फुटपाथों पर फैली दुकानों के कारण चलने-फिरने में भारी परेशानी होती है। ट्रेन पकड़ने की जल्दी में अक्सर लोगों को भीड़ और अतिक्रमण के बीच से गुजरना पड़ता था।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद स्टेशन परिसर अधिक खुला और व्यवस्थित दिखाई देगा तथा व्यस्त समय में यात्रियों को राहत मिलेगी।

“बुलडोज़र राजनीति” पर ममता बनर्जी का हमला

इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गरीब हॉकर्स और फुटपाथ दुकानदार राजनीतिक अहंकार की कीमत चुका रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग “बुलडोज़र राजनीति” में विश्वास नहीं करते। ममता बनर्जी की इस टिप्पणी के बाद राज्य में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

पहले भी चल चुका है अभियान

हावड़ा स्टेशन परिसर में हॉकर्स हटाने की यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी रेलवे प्रशासन कई बार नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने की कोशिश कर चुका है। हालांकि हर बार कुछ समय बाद फुटपाथों पर फिर से दुकानें लगने लगी थीं।
इस बार की बड़ी कार्रवाई के बाद यात्रियों का एक वर्ग संतोष जता रहा है। उनका कहना है कि इससे स्टेशन के बाहर भीड़भाड़ कम होगी और आवागमन आसान बनेगा। वहीं दूसरी ओर छोटे दुकानदार और हॉकर्स अपने रोजगार को लेकर चिंता जता रहे हैं।

गरीबों की रोजी-रोटी बनाम शहर प्रबंधन की चुनौती

हावड़ा स्टेशन के बाहर चला यह बुलडोज़र अभियान अब केवल अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर प्रबंधन, फुटपाथ व्यापारियों के अधिकार और गरीबों की आजीविका से जुड़ी बड़ी बहस का रूप ले चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर को व्यवस्थित रखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ छोटे व्यापारियों के पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी गंभीरता से काम किया जाना चाहिए।

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