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Homeबंगालशांतिपूर्ण मतदान: मिनाक्षी और दीप्तसिता ने बदली चुनावी तस्वीर

शांतिपूर्ण मतदान: मिनाक्षी और दीप्तसिता ने बदली चुनावी तस्वीर

शांतिपूर्ण मतदान के बीच मिनाक्षी और दीप्तसिता का दावा—बंगाल में बिना हिंसा हुआ वोट, जानें पूरी रिपोर्ट।

वामपंथी उम्मीदवारों का दावा—कई कोशिशों के बावजूद नहीं हुई हिंसा, शांतिपूर्ण मतदान, मतदाताओं ने खुद डाला वोट

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता | 29 अप्रैल 2026

शांतिपूर्ण मतदान इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अलग ही कहानी लेकर आया। उत्तरपाड़ा और उत्तर दमदम में वामपंथी उम्मीदवार मिनाक्षी मुखोपाध्याय और दीप्तसिता धर ने चुनाव के बाद जो तस्वीर पेश की, वह पिछले कई चुनावों से बिल्कुल अलग रही। दोनों ने साफ कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही और लोगों ने बिना डर के अपने वोट डाले।

शांतिपूर्ण मतदान

इस चुनाव में दोनों उम्मीदवारों की रणनीति अलग-अलग थी, लेकिन मकसद एक ही—शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना। मिनाक्षी ने पहले से ही संवेदनशील इलाकों का नक्शा तैयार कर लिया था और पूरे दिन उन्हीं जगहों पर नजर बनाए रखी। दूसरी तरफ, दीप्तसिता ने तय योजना के बजाय हालात के अनुसार कदम उठाने की रणनीति अपनाई और सुबह से शाम तक पूरे क्षेत्र में घूमती रहीं।

हुगली के उत्तरपाड़ा विधानसभा क्षेत्र में पहले कई बार कोन्नगर, नवग्राम और कनाईपुर जैसे इलाकों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती थीं। इस बार मिनाक्षी ने सुबह से लेकर दोपहर तक अधिकतर समय इन्हीं क्षेत्रों में बिताया। जहां पार्टी मजबूत थी, वहां समय न लगाकर उन्होंने सीधे उन इलाकों पर ध्यान दिया जहां पहले समस्या रही थी।

इस सीट पर मिनाक्षी का मुकाबला तृणमूल उम्मीदवार शীর্ষণ্য बंद्योपाध्याय और बीजेपी के दीपांजन चक्रवर्ती से था। चुनाव के दौरान एक बूथ पर मिनाक्षी और शীর্ষণ্য आमने-सामने भी आए, लेकिन राजनीतिक मतभेद के बावजूद दोनों के बीच शिष्टाचार बना रहा।

वहीं, उत्तर दमदम में दीप्तसिता किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहीं। निमता, न्यू बैरकपुर और बिराटी जैसे इलाकों में लगातार दौरा करती रहीं। सुबह के समय कुछ जगहों पर हल्की अशांति की खबर मिलने पर उन्हें तुरंत वहां पहुंचना पड़ा, लेकिन स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई।

उत्तर दमदम सीट पर दीप्तसिता का मुकाबला राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य से है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार सीपीएम ने जानबूझकर महिला उम्मीदवार को महिला मंत्री के खिलाफ उतारा है।

पिछले डेढ़ दशक में वाम दल अक्सर चुनाव में धांधली और हिंसा के आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन इस बार दोनों उम्मीदवारों ने माना कि लोगों ने स्वतंत्र रूप से मतदान किया। उनके मुताबिक, इस बार न तो बड़े स्तर पर हिंसा हुई और न ही बूथ कब्जाने जैसी घटनाएं सामने आईं।

दोनों उम्मीदवारों ने मतदान प्रक्रिया पर संतोष जताया है। अब देखना यह है कि यह संतोष जीत में बदलता है या नहीं। इसका जवाब आने वाले सोमवार को मतगणना के बाद ही मिलेगा।

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