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घर-घर सर्वे: यूपी में अवैध बांग्लादेशी-रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान के लिए अभियान तेज

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का घर-घर सर्वे अभियान अवैध बांग्लादेशी-रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान और डिटेंशन सेंटर बनाने के उद्देश्य से राज्यव्यापी तेजी से जारी है।

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क | 7 दिसंबर 2025, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा शुरू किया गया घर-घर सर्वे अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान के उद्देश्य से पूरे राज्य में तेजी से जारी है। इस अभियान के तहत पुलिस और स्थानीय प्रशासन घर-घर जाकर इन अवैध निवासियों की तलाश कर रहे हैं। डिटेंशन सेंटर बनाने का आदेश 22 नवंबर को जारी किया गया था और अब राज्य भर में इसके लिए सरकारी भवनों और सामुदायिक केंद्रों को इस्तेमाल में लाया जा रहा है।

योगी सरकार ने अवैध प्रवासियों की पहचान हेतु पूरे प्रदेश में इस घर-घर सर्वे को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जिसका मकसद राज्य को अवैध प्रवासियों से मुक्त करना है। झांसी रेंज के आईजी आकाश कुलहरी ने भी पुष्टि की है कि ललितपुर, झांसी व जालौन समेत बुंदेलखंड क्षेत्र में डिटेंशन सेंटर बनाए जाएंगे जहां इन अवैध प्रवासियों को रखने की तैयारी है।

आगरा के डीसीपी सैयद अली अब्बास के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में लगभग 3,000 अवैध प्रवासी काम कर रहे हैं और टीम घर-घर जाकर उनके अपराध रिकॉर्ड जांच रही है। लखनऊ की महापौर सुषमा खरकवाल ने दावा किया कि सफाई कर्मचारियों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या शामिल हैं, जिन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया जारी है। कुछ भाग चुके हैं और जाली दस्तावेजों से आधार कार्ड बनवाए जाने की आशंका जताई गई है।

गृह विभाग सूत्रों से पता चला है कि राज्य में दो साल पहले की गई खुफिया सर्वे में लगभग 10 लाख अवैध विदेशी पाए गए थे, जिनमें लखनऊ और आगरा में 6,000 थे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार के घर-घर सर्वे से बेहतर और त्वरित परिणाम मिलेंगे। प्रशासन ने मार्च 2026 तक इस अभियान को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

यूपी का पहला डिटेंशन सेंटर और पिछली कार्रवाइयां

2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने अवैध प्रवासियों को रखने हेतु पहले डिटेंशन सेंटर की शुरुआत की थी। गाजियाबाद के नंदग्राम में स्थित यह केंद्र पहले एक छात्रावास था जिसे बाद में डिटेंशन कैंप में बदला गया।

साल 2025 में हुए ‘आई लव मुहम्मद’ अभियान के दौरान भी अवैध प्रवासियों और मुस्लिम युवकों को निशाना बनाया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश में 16 से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं और हजारों की संख्या में गिरफ्तारियां हुईं। खासकर कानपुर, बरेली, उन्नाव, मेरठ और शाहजहांपुर जिलों में यह कार्रवाई तेज हुई। इस अभियान को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने इसे “एक समुदाय के प्रति नफरत” का प्रतीक बताया है।

 

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