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Homeताजा खबरएक मंच पर दिखे सत्ता और विपक्ष के सभी चेहरे

एक मंच पर दिखे सत्ता और विपक्ष के सभी चेहरे

सत्ता और विपक्ष के नेता एक ही मंच पर दिखाई दिए। कोलकाता के एक विशेष समारोह में भाजपा, कांग्रेस, वाम दलों और तृणमूल कांग्रेस के विभिन्न गुटों के नेताओं ने एक साथ मौजूद रहकर लोकतांत्रिक संवाद, सौहार्द और राजनीतिक शिष्टाचार का संदेश दिया।

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता |18 जुलाई 2026
सत्ता और विपक्ष के नेता एक ही मंच पर दिखाई देने का दुर्लभ अवसर कोलकाता में आयोजित एक विशेष समारोह में देखने को मिला। आमतौर पर राजनीतिक मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ तीखे हमले करने वाले विभिन्न दलों के नेताओं ने इस अवसर पर एक साथ उपस्थित होकर यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में संवाद और सम्मान की परंपरा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने बिना किसी कटुता के हिस्सा लेकर लोकतांत्रिक संस्कृति की सकारात्मक तस्वीर पेश की।

तृणमूल कांग्रेस के विभिन्न गुट भी आए आमने-सामने

सत्ता

समारोह की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि तृणमूल कांग्रेस के अलग-अलग राजनीतिक धड़ों से जुड़े नेता भी एक ही सभागार में मौजूद रहे। कार्यक्रम में क्रमशः कुणाल घोष, कल्याण बनर्जी, शताब्दी राय, ऋतब्रत बंद्योपाध्याय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, मदन मित्र और फिरहाद हाकिम जैसे प्रमुख नेता पहुंचे।
इनमें कुछ नेता वर्तमान नेतृत्व के साथ जुड़े हैं, जबकि कुछ अलग राजनीतिक राह चुन चुके हैं। इसके बावजूद पूरे आयोजन में किसी प्रकार की असहजता देखने को नहीं मिली और सभी नेताओं ने सहज वातावरण में कार्यक्रम का आनंद लिया।

भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं की भी रही मौजूदगी

सत्ता

समारोह में पश्चिम बंगाल की नई सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ कांग्रेस, वामपंथी दलों तथा तृणमूल कांग्रेस के विभिन्न गुटों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी विशेष बना दिया। राजनीतिक रूप से एक-दूसरे के विरोधी माने जाने वाले नेता एक ही सभागार में बैठे और पूरे कार्यक्रम के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखा।
हालाँकि सभी अलग-अलग स्थानों पर बैठे थे, लेकिन कार्यक्रम के दौरान कई नेताओं के बीच अभिवादन और अनौपचारिक बातचीत भी देखने को मिली।

देव और ब्रात्य बसु की रही अलग भूमिका

कार्यक्रम में अभिनेता एवं सांसद देव तथा राज्य के पूर्व मंत्री ब्रात्य बसु भी मौजूद रहे। हालांकि दोनों की भूमिका अन्य नेताओं से अलग रही। देव को समारोह में सम्मानित किया गया, जबकि ब्रात्य बसु ने पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। इसलिए उनकी उपस्थिति को सामान्य राजनीतिक सहभागिता से अलग माना गया।
कार्यक्रम के दौरान फिरहाद हाकिम और कुणाल घोष के बीच आत्मीय अभिवादन ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। राजनीतिक मंचों पर एक-दूसरे की आलोचना करने वाले इन नेताओं ने यहाँ पूरी गर्मजोशी से एक-दूसरे का स्वागत किया। इसी तरह कल्याण बनर्जी को सांसद देव के साथ भी सौहार्दपूर्ण बातचीत करते देखा गया।
इन दृश्यों ने यह संकेत दिया कि लोकतंत्र केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नाम नहीं, बल्कि मतभेदों के बावजूद सम्मान और संवाद बनाए रखने की संस्कृति का भी प्रतीक है।
समारोह में उपस्थित कई लोगों का मानना था कि इस आयोजन ने पश्चिम बंगाल की उस राजनीतिक संस्कृति की याद ताज़ा कर दी, जब अलग-अलग विचारधाराओं के नेता सार्वजनिक मंचों पर भी एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखते थे। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह होते थे, लेकिन व्यक्तिगत संबंध और लोकतांत्रिक शिष्टाचार हमेशा कायम रहता था।
इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावी प्रतिस्पर्धा से नहीं, बल्कि आपसी संवाद, सम्मान और स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति से भी होती है।

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