शुभेंदु अधीकारी के समर्थन में डायमंड हार्बर समेत कई नगरपालिकाओं के तृणमूल पार्षदों ने दिया इस्तीफा। काकली घोष दस्तिदार ने भी संगठन और I-PAC पर उठाए सवाल, बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल।
Qalam Times News Network
कोलकाता | 25 मई 2026
डायमंड हार्बर से लेकर कांथी, भाटपाड़ा और उत्तर बैरकपुर तक तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी संकट गहराया, कई पार्षदों ने संगठन और नेतृत्व पर उठाए सवाल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों शुभेंदु अधीकारी का नाम लगातार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। राज्य में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर जो असंतोष धीरे-धीरे पनप रहा था, अब वह खुलकर सामने आने लगा है। सोमवार को डायमंड हार्बर नगरपालिका के 8 तृणमूल पार्षदों ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इन पार्षदों ने एसडीओ कार्यालय पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा।

इस्तीफा देने वाले पार्षद अमित साहा ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शुभेंदु अधीकारी जिस तरह राज्य के विकास की बात कर रहे हैं, उससे वे प्रभावित हुए हैं। उनके मुताबिक राज्य की राजनीति में विकास आधारित वैकल्पिक सोच की जरूरत है और उसी सोच से प्रेरित होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
तृणमूल के भीतर बढ़ता असंतोष
डायमंड हार्बर, जिसे अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, वहां से इस तरह की घटनाएं सामने आना तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब पार्टी के किसी जनप्रतिनिधि ने खुलकर शुभेंदु अधीकारी की तारीफ की हो। इससे पहले फलता उपचुनाव के दौरान भी कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से शुभेंदु के नेतृत्व और राजनीतिक शैली की सराहना की थी।
4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से तृणमूल कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और असंतोष लगातार उजागर हो रहा है। कई स्थानों पर पार्टी के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं। साथ ही भ्रष्टाचार, संगठनात्मक कमजोरी और नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
कई नगरपालिकाओं में सामूहिक इस्तीफे
सोमवार को केवल डायमंड हार्बर ही नहीं, बल्कि उत्तर बैरकपुर, कांथी, भाटपाड़ा, हालीशहर और गरुलिया नगरपालिकाओं में भी तृणमूल पार्षदों ने इस्तीफा दिया।
भाटपाड़ा नगरपालिका में नगर प्रमुख समेत 30 पार्षदों ने पद छोड़ दिया। वहीं कांथी नगरपालिका में 12 पार्षदों के इस्तीफे के बाद प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया, जिसके चलते महकमा शासक को नगरपालिका प्रशासक नियुक्त किया गया है।
उत्तर बैरकपुर में चेयरमैन सहित 15 पार्षदों ने इस्तीफा दिया, जबकि हालीशहर में 16 और गरुलिया में 10 पार्षदों ने अपने पद से हटने का फैसला किया।
2022 नगरपालिका चुनाव पर फिर उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 के नगरपालिका चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने लगभग सभी नगरपालिकाओं पर कब्जा जमा लिया था। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि कई जगहों पर चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। भाजपा और अन्य दलों ने उस समय भी मतदान में धांधली और दबाव की शिकायत की थी।
हालांकि, ताहेरपुर नगरपालिका इसका अपवाद रही, जहां वामपंथी दल जीतने में सफल हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि अब तक ताहेरपुर नगरपालिका को लेकर विपक्ष की ओर से किसी बड़े भ्रष्टाचार या अनियमितता का आरोप सामने नहीं आया है।
काकली घोष दस्तिदार का इस्तीफा बना नई बहस का कारण

तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष को और हवा तब मिली जब वरिष्ठ सांसद काकली घोष दस्तिदार ने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए संगठन की कार्यप्रणाली, भ्रष्टाचार और प्रचार तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए।
राज्य तृणमूल अध्यक्ष सुब्रत बक्शी को भेजे गए अपने पत्र में काकली ने पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे और राजनीतिक रणनीति पर नाराजगी जताई। उन्होंने संकेतों में चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC और अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं को निशाने पर लिया।
अपने पत्र में उन्होंने ममता बनर्जी से अपील की कि वे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ फिर से जमीनी राजनीति करें। उन्होंने लिखा कि “अस्थायी और अवसरवादी संगठनों के भरोसे कठिन राजनीतिक लड़ाइयां नहीं जीती जा सकतीं।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान तृणमूल कांग्रेस के भीतर पुराने और नए नेतृत्व के बीच बढ़ते टकराव को साफ तौर पर उजागर करता है।







