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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की शपथ के दौरान गेरुआ फतुआ और सफेद धोती बनी चर्चा का केंद्र

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह में पारंपरिक बंगाली पहनावे और RSS संकेतों की चर्चा तेज

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता | 09 May 2026
पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को ब्रिगेड मैदान में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अपने पारंपरिक पहनावे से राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों तरह के संकेत दिए। गेरुआ रंग का आधी बांह वाला फतुआ, सफेद धुती पर हल्की लाल किनारी और माथे पर गेरुआ तिलक— मुख्यमंत्री का यह अंदाज पूरे समारोह में आकर्षण का केंद्र बना रहा।
राजनीतिक गलियारों में शुभेंदु अधिकारी के इस विशेष परिधान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके पहनावे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की झलक दिखाई दी, वहीं कुछ लोग इसे बंगाली संस्कृति और पहचान से जुड़ा संदेश मान रहे हैं।
RSS और बंगाली पहचान का मिला-जुला संदेश
राजनीतिक जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण के लिए जिस तरह का वस्त्र चुना, वह सिर्फ पारंपरिक नहीं बल्कि प्रतीकात्मक भी था। RSS के प्रचारकों और पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को अक्सर आधी बांह वाले सादे फतुए में देखा जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री का गेरुआ फतुआ पहनना संघ के प्रति एक सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल भाजपा में RSS का पारंपरिक चेहरा नहीं माना जाता, लेकिन पार्टी और संघ नेतृत्व के बीच उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है। सूत्रों के मुताबिक, संघ के पूर्वी क्षेत्र के वरिष्ठ नेतृत्व ने भी उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमति जताई थी।
 “साधारण जीवन” की छवि दिखाने की कोशिश
विश्लेषकों का कहना है कि शपथ समारोह में साधारण और पारंपरिक वेशभूषा अपनाकर शुभेंदु अधिकारी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे आम लोगों से जुड़े रहेंगे। RSS की विचारधारा में सादगी और सामान्य जीवनशैली को विशेष महत्व दिया जाता है और शुभेंदु के पहनावे में उसी सोच की झलक दिखाई दी।
शुभेंदु अधिकारी चुनाव प्रचार के दौरान अधिकतर सफेद पंजाबी और पायजामा में नजर आए थे। कई मौकों पर उन्होंने गेरुआ या हल्के पीले रंग के कुर्ते भी पहने, लेकिन शपथ ग्रहण के दिन उनका पूरा पारंपरिक लुक खास चर्चा में रहा।
बंगाली भावना को साधने की कोशिश
गेरुआ फतुए के साथ सफेद धुती पर लाल किनारी ने बंगाली सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत किया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा पर लगातार “बंगाल विरोधी” होने के आरोपों के बीच शुभेंदु अधिकारी ने अपने पहनावे के जरिए बंगाली अस्मिता का संदेश देने की कोशिश की।
चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस लगातार भाजपा पर बंगाली संस्कृति के खिलाफ होने का आरोप लगाती रही थी। ऐसे में बंगाली परंपरा से जुड़ी धुती पहनकर शपथ लेना एक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
अन्य मंत्रियों का पहनावा भी चर्चा में
शुभेंदु अधिकारी के साथ शनिवार को शपथ लेने वाले अन्य नेताओं के पहनावे ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
दिलीप घोष सफेद फुल स्लीव पंजाबी और पायजामा में नजर आए।
अग्निमित्रा पाल ने लाल किनारी वाली सफेद साड़ी पहनी थी, जिसके साथ भाजपा के कमल चिह्न वाला गेरुआ-हरा दुपट्टा था।
निशीथ प्रमाणिक सफेद पायजामा-पंजाबी और पीले रंग के पारंपरिक उत्तरीय में दिखाई दिए।
अशोक कीर्तनिया सफेद शर्ट-पैंट और भाजपा के प्रतीक वाले गेरुआ दुपट्टे में नजर आए।
क्षुदिराम टुडू हल्के गेरुआ रंग के कुर्ते-पायजामे में दिखाई दिए।
 राजनीतिक संदेशों से भरपूर रहा शपथ समारोह
ब्रिगेड मैदान में आयोजित यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ सत्ता परिवर्तन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि प्रतीकों, संदेशों और सांस्कृतिक संकेतों का भी मंच बन गया। खासतौर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पहनावे ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

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