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Homeमिडियावेतन बकाया और कथित अवैध बंदी पर श्रम विभाग ने तेज की...

वेतन बकाया और कथित अवैध बंदी पर श्रम विभाग ने तेज की कार्यवाही, छपाई स्थगन पर उठे सवाल, कोर्ट में राष्ट्रीय सहारा प्रबंधन का पक्ष

छपाई स्थगन को लेकर राष्ट्रीय सहारा प्रबंधन ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। वेतन बकाया और अवैध बंदी के मामले में डीएलसी लखनऊ ने अगली सुनवाई की तारीख तय की।

Qalam Times News Network
लखनऊ | 22 जनवरी 2026

छपाई स्थगन

छपाई स्थगन को लेकर उठे सवालों के बीच राष्ट्रीय सहारा अख़बार से जुड़े कर्मचारियों के वेतन बकाया और कथित अवैध बंदी के मामले में श्रम विभाग की कार्यवाही तेज हो गई है। इस संबंध में डीएलसी (डिप्टी लेबर कमिश्नर) लखनऊ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनते हुए 19 जनवरी 2026 को एक अहम आदेश पारित किया।

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय सहारा प्रबंधन की ओर से उपस्थित वकील ने कोर्ट को बताया कि अख़बार को बंद नहीं किया गया है, बल्कि उसकी छपाई स्थगन की स्थिति में रखी गई है। वकील के अनुसार, अख़बार की मौजूदा वित्तीय हालत कमजोर है, जिस कारण प्रकाशन अस्थायी रूप से रोका गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे ही आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, अख़बार का प्रकाशन दोबारा शुरू किया जा सकता है।

दूसरी ओर, कर्मचारी पक्ष ने प्रबंधन के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अख़बार का प्रकाशन बिना किसी पूर्व सूचना और वैधानिक प्रक्रिया के अवैध रूप से बंद किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे वे गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि अक्टूबर 2025 से अब तक कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है।

डीएलसी लखनऊ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में अगली सुनवाई की तारीख 28 जनवरी 2026 निर्धारित की है। अगली सुनवाई में अवैध बंदी, वेतन बकाया और संबंधित दस्तावेज़ों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

फिलहाल मामला श्रम विभाग की निगरानी में है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय और बकाया वेतन नहीं मिल जाता, तब तक उनकी कानूनी और संगठनात्मक लड़ाई जारी रहेगी।

 

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