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Homeताजा खबरबुलडोज़र राज पर हाईकोर्ट की रोक, तोपसिया पहुंचे CPI(M) नेता लेकर गए...

बुलडोज़र राज पर हाईकोर्ट की रोक, तोपसिया पहुंचे CPI(M) नेता लेकर गए अदालत का आदेश

बुलडोज़र राज पर कोलकाता हाईकोर्ट ने तोपसिया में निर्माण तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगा दी। अदालत का आदेश लेकर CPI(M) नेता इलाके में पहुंचे और कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया किसी घर को नहीं तोड़ा जा सकता। भाजपा सरकार की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

Qalam Times News Network
कोलकाता |16 मई 2026
बुलडोज़र राज को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता हाईकोर्ट ने तोपसिया इलाके में कथित अवैध निर्माणों को गिराने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के आदेश की प्रति लेकर शुक्रवार शाम CPI(M) के राज्य कमिटी सदस्य शतरूप घोष, पार्टी नेता दीपू दास और अन्य वामपंथी कार्यकर्ता तोपसिया पहुंचे और स्थानीय लोगों के बीच अदालत का आदेश बांटा।
वाम नेताओं ने लोगों से कहा कि यदि प्रशासन फिर से बुलडोज़र कार्रवाई करने की कोशिश करे तो वे अदालत का यह आदेश दिखाएं। CPI(M) ने साफ शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में “बुलडोज़र राज” लागू नहीं होने दिया जाएगा और पार्टी सड़क से लेकर अदालत तक इसका विरोध करेगी।

बुलडोज़र राज  : हाईकोर्ट ने लगाई कार्रवाई पर रोक

कोलकाता हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर किसी इमारत को ध्वस्त नहीं किया जा सकता। अदालत में प्रभावित लोगों ने दावा किया कि उन्हें कोई वैधानिक नोटिस नहीं दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। इसके बावजूद अचानक बुलडोज़र चलाकर घरों और इमारतों को तोड़ा गया।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजा बसु राय चौधरी ने टिप्पणी की कि अवैध निर्माणों पर पूर्ववर्ती सरकारों ने समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की थी। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि यदि निर्माण अवैध हैं, तब भी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर ही करनी होगी।
अदालत ने फिलहाल बुलडोज़र से तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि जहां निर्माण तोड़ा गया है, वहां अभी किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं चलेगी और न ही कोई व्यक्ति वहां रह सकेगा। पुनर्वास को लेकर फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।

तोपसिया में लोगों के बीच पहुंचे वाम नेता

हाईकोर्ट के आदेश के बाद CPI(M) नेताओं ने तोपसिया पहुंचकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इलाके में पहले से ही भय और असुरक्षा का माहौल बताया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी भी सरकार को कानून से ऊपर जाकर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
CPI(M) नेताओं का आरोप है कि आग की घटना के बाद राज्य सरकार ने अवैध निर्माण के नाम पर रातोंरात बुलडोज़र भेजकर खासतौर पर अल्पसंख्यक इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की। पार्टी का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई धार्मिक या राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित नहीं होनी चाहिए।

आग की घटना के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई

गौरतलब है कि पिछले मंगलवार तोपसिया इलाके की एक चमड़ा फै्ट्री में भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने इलाके में कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तोपसिया और अन्य अल्पसंख्यक बहुल इलाकों का विशेष उल्लेख करते हुए अवैध निर्माणों पर “जीरो टॉलरेंस” की बात कही थी।
इसी के बाद इलाके में बुलडोज़र और भारी पुलिस बल पहुंचा था, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी।

“क्या सिर्फ अल्पसंख्यक इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है?”

CPI(M) के राज्य कमिटी सदस्य सुदीप सेनगुप्ता ने जादवपुर में आयोजित एक सभा में सवाल उठाया कि क्या बड़े बाजार जैसे इलाकों में भी इसी तरह बुलडोज़र भेजे गए? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कार्रवाई में धार्मिक विभाजन की झलक दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक असंतोष के कारण कुछ लोग भाजपा सरकार से उम्मीदें लगाए बैठे थे, लेकिन प्रशासनिक कदम अगर धार्मिक पहचान के आधार पर उठाए जाएंगे तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत होगा।

वैध दस्तावेज़ होने का दावा

इस मामले में प्रभावित भवन मालिकों का कहना है कि उनके पास वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं और केवल अग्निशमन विभाग का “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” नहीं था। उनका आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त जांच और सुनवाई के कार्रवाई शुरू कर दी।
अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि “बुलडोज़र राज”, प्रशासनिक अधिकार और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर बड़ी राजनीतिक बहस बन चुका है।

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