पश्चिम बंगाल अधिकारी विवाद को लेकर राज्यसभा में टीएमसी सांसदों का वॉकआउट, चुनाव आयोग के फैसले पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने।
क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली | 16 मार्च 2026
पश्चिम बंगाल अधिकारी विवाद पर संसद में गूंजा राजनीतिक टकराव
पश्चिम बंगाल अधिकारी विवाद को लेकर सोमवार को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में तीखा राजनीतिक माहौल देखने को मिला। चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव सहित राज्य के कुछ शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को पद से हटाने के निर्णय पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसी मुद्दे को लेकर टीएमसी सांसदों ने राज्यसभा की कार्यवाही से पूरे दिन के लिए वॉकआउट कर दिया।
टीएमसी का विरोध, सरकार का पलटवार
संसद में उठे पश्चिम बंगाल अधिकारी विवाद के बीच टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने शून्यकाल शुरू होते ही इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की। उन्होंने सभापति से मात्र तीन सेकंड में अपनी बात रखने की अनुमति मांगी। ओ’ब्रायन ने कहा कि चुनाव आयोग ने देर रात पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और गृह सचिव को अचानक पद से हटा दिया है। उनका कहना था कि आयोग के पास व्यापक अधिकार हैं, लेकिन इस निर्णय को लेकर पार्टी गंभीर आपत्ति दर्ज कराना चाहती है।
अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी सदन का समय व्यर्थ नहीं करेगी और विरोध दर्ज कराने के लिए राज्यसभा से पूरे दिन के लिए बहिर्गमन कर रही है। इसके तुरंत बाद टीएमसी के सांसद सदन से बाहर चले गए।
किरेन रिजीजू ने जताई आपत्ति
टीएमसी सांसदों के इस कदम पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह विषय राज्यसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं था, इसके बावजूद इसे अचानक उठाया गया, जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
रिजीजू ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे संविधान द्वारा निर्धारित अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे मामलों को लेकर संसद की कार्यवाही का उपयोग करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस समय-समय पर चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाती रही हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं है।
सड़क से संसद तक विरोध
गौरतलब है कि टीएमसी पहले से ही एसआईआर (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। पार्टी का कहना है कि आयोग के कुछ फैसले राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। इसी कारण पार्टी के सांसद सड़क से लेकर संसद तक लगातार अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
सोमवार को राज्यसभा में हुआ वॉकआउट इसी विरोध का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।






