पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची विवाद गहराया, 60 लाख से अधिक विवेचनाधीन वोटर के मामलों पर 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती।
क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता | 4 मार्च 2026
विवेचनाधीन वोटर: 60 लाख से अधिक नाम अब भी जांच के दायरे में, अब तक केवल 4 लाख मामलों का निपटारा; 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया के बीच विवेचनाधीन वोटर का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लगभग 60 लाख से अधिक नाम अभी भी विवेचनाधीन वोटर के रूप में लंबित हैं। चुनाव आयोग के अनुसार अब तक केवल करीब 4 लाख मामलों का ही निपटारा हो पाया है, जबकि बाकी लाखों मामलों की जांच अभी जारी है। इसी कारण सभी की निगाहें 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, राज्य की मतदाता सूची की जांच के दौरान करीब 63 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं। इन नामों को हटाने के पीछे अलग-अलग कारण बताए गए हैं—कई लोग मृत पाए गए, कुछ अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो चुके थे, कुछ मतदाता लंबे समय से अनुपस्थित थे और कई लोगों के नाम अन्य क्षेत्रों की सूची में पहले से दर्ज थे। इसके अलावा अभी 60,06,675 नाम विवेचनाधीन वोटर की श्रेणी में रखे गए हैं, जिनकी जांच न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
मंगलवार शाम तक आयोग को केवल 4 लाख मामलों में अंतिम फैसला लेने में सफलता मिली है। इसका मतलब है कि अब भी लगभग 56 लाख मामलों की सुनवाई और जांच बाकी है। आयोग के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन मामलों का निपटारा आखिर कब तक हो पाएगा। हालांकि आयोग उम्मीद जता रहा है कि जल्द ही इस प्रक्रिया में तेजी आएगी।
जांच तेज करने के लिए दूसरे राज्यों से जज बुलाए जाएंगे
चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को तेज करने के लिए न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। जानकारी के अनुसार बिहार और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों से लगभग 200 अतिरिक्त न्यायाधीशों को पश्चिम बंगाल बुलाया जा रहा है। आयोग का मानना है कि उनके जुड़ने से दस्तावेज़ों की जांच और फैसलों की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी।
इसके बावजूद अभी यह साफ नहीं है कि शेष लाखों मामलों का निपटारा तय समय में हो पाएगा या नहीं। इसी अनिश्चितता के बीच सभी पक्षों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिक गई है।
सुप्रीम कोर्ट में 10 मार्च को होगी अहम सुनवाई
10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में SIR से जुड़ी याचिका पर अगली सुनवाई होनी है। आयोग के सूत्रों के अनुसार उस दिन अदालत को बताया जाएगा कि अब तक कितने मामलों का निपटारा हो चुका है, कितने मामले लंबित हैं और पूरी प्रक्रिया के दौरान किन व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मालदा और मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा लंबित मामले
राज्य की अंतिम मतदाता सूची के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक विवेचनाधीन वोटर मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में हैं।
मालदा जिले में नई मतदाता सूची के अनुसार कुल 29,86,203 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इनमें से 8,28,080 नाम अब भी विवेचनाधीन सूची में शामिल हैं। अगर अब तक के निपटाए गए मामलों की तुलना की जाए तो पता चलता है कि पूरे राज्य में जितने मामलों का फैसला हुआ है, वह मालदा जिले के लंबित मामलों के आधे के बराबर ही है।
चुनाव तैयारी की समीक्षा बैठक
आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने एक और समीक्षा बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह बैठक गुरुवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय में वर्चुअल माध्यम से आयोजित होगी।
सूत्रों के मुताबिक डिप्टी चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती के नेतृत्व में यह बैठक सुबह 10:30 बजे से दो चरणों में आयोजित की जाएगी। अगले सप्ताह आयोग की पूरी टीम के पश्चिम बंगाल आने की भी संभावना है।
जानकारी के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग की फुल बेंच 9–10 मार्च को राज्य का दौरा कर सकती है। इस दौरान वे जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और चुनाव से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। परंपरा के अनुसार इस तरह की बैठकों के कुछ ही दिनों बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा भी हो सकती है।
बूथ पुनर्गठन की योजना फिलहाल रद्द
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस बार नए बूथ पुनर्गठन की योजना फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
राज्य में पहले से मौजूद 80,681 मतदान केंद्र ही बरकरार रहेंगे। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की विशेष समीक्षा प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल बूथों का पुनर्गठन नहीं किया जाएगा।
चुनाव से पहले केंद्रीय बलों की तैनाती
विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही राज्य में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती शुरू हो चुकी है। कई इलाकों में सुरक्षा बलों ने रूट मार्च भी शुरू कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार राज्य में कुल 480 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात की जानी हैं। इनमें से पहले चरण में 240 कंपनियां पहुंच चुकी हैं, जबकि मार्च के दूसरे सप्ताह में बाकी 240 कंपनियों के आने की संभावना है।
लालबाजार के सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक योजना के तहत छत्तीसगढ़ से 12 कंपनियां CRPF की कोलकाता पहुंचेंगी। इन बलों के ठहरने के लिए शहर के कई स्कूल और कॉलेजों को अस्थायी कैंप के रूप में तैयार किया जा रहा है।






