कोणार्क नाट्य पाठ के माध्यम से लिटिल थेस्पियन ने कोलकाता में 44वें रंग अड्डा का आयोजन किया। खिदिरपुर कॉलेज और गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज के सहयोग से छात्रों ने रंगमंच के जरिए साहित्य को नए दृष्टिकोण से समझा।
खिदिरपुर कॉलेज और गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में जगदीश चंद्र माथुर के चर्चित नाटक कोणार्क का प्रभावशाली नाट्य पाठ, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने साहित्य एवं रंगमंच के संबंध पर की सार्थक चर्चा।
Qalam Times News Network
कोलकाता | 7 जुलाई, 2026
कोणार्क नाट्य पाठ को केंद्र में रखते हुए कोलकाता की प्रतिष्ठित हिंदी-उर्दू नाट्य संस्था लिटिल थेस्पियन ने अपना 44वाँ रंग अड्डा 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:00 बजे खिदिरपुर कॉलेज के कॉन्फ्रेंस रूम में सफलतापूर्वक आयोजित किया। खिदिरपुर कॉलेज और गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में जगदीश चंद्र माथुर के प्रसिद्ध नाटक ‘कोणार्क’ का प्रभावशाली नाट्य पाठ प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को रंगमंच के माध्यम से साहित्य को अधिक जीवंत, व्यावहारिक और सहज रूप में समझाना था।

लिटिल थेस्पियन वर्षों से युवा पीढ़ी को रंगमंच से जोड़ने के लिए रंग अड्डा का आयोजन करता आ रहा है। कोणार्क नाट्य पाठ इसी पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रम में शामिल साहित्यिक कृतियों से रचनात्मक ढंग से परिचित कराया गया। इस कार्यक्रम में पाठ्यक्रम में निर्धारित किसी कहानी अथवा नाटक का चयन कर कार्यशालाओं और नाट्य पाठ के जरिए विद्यार्थियों को उसकी कथावस्तु, पात्रों, भाषा और नाटकीय संरचना को सरल एवं रोचक ढंग से समझने का अवसर दिया जाता है, जिससे उनके शैक्षणिक अध्ययन को भी नई दिशा मिलती है।
चूँकि ‘कोणार्क’ दोनों महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा है, इसलिए इस बार के रंग अड्डा के लिए इसी नाटक का चयन किया गया। नाट्य पाठ का मंचन लिटिल थेस्पियन के कलाकार मो. आसिफ अंसारी, एनी दास, पद्माकर व्यास, डॉ. रमाशंकर सिंह, शंभू सिंह, शाहबाज खान, भावेश भगत और अभिषेक राय ने किया। सभी कलाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से नाटक के पात्रों और भावभूमि को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज की प्रो. डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी तथा खिदिरपुर कॉलेज की प्रो. डॉ. इतु सिंह ने विद्यार्थियों को नाटक की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साहित्यिक महत्व और समकालीन प्रासंगिकता से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि साहित्य को गहराई से समझने का प्रभावी शैक्षणिक उपकरण भी है।
कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच हुई सार्थक चर्चा के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और स्मरणीय अनुभव बताया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के कार्यक्रम भविष्य में भी विद्यार्थियों को साहित्य और रंगमंच के प्रति आकर्षित करते रहेंगे।







