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वोटर लिस्ट गड़बड़ी: असम में ज़िंदा लोगों को ‘मृत’ बताकर नाम हटाने की कोशिश, एक व्यक्ति ने 64 मतदाताओं पर की आपत्ति

वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर असम के नगांव ज़िले से बड़ा खुलासा, ज़िंदा मतदाताओं को मृत बताकर नाम हटाने की कोशिश, प्रशासन ने रोकी सुनवाई और जांच जारी।

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

नगांव (असम) | 23 जनवरी 2026

वोटर लिस्ट गड़बड़ी : नगांव ज़िले में वोटर लिस्ट के विशेष संशोधन के दौरान फर्जी आपत्तियों का खुलासा, प्रशासन ने रोकी सार्वजनिक सुनवाई

वोटर लिस्ट गड़बड़ी

वोटर लिस्ट गड़बड़ी एक बार फिर असम में सामने आई है, जहां विधानसभा चुनाव से पहले चल रही विशेष संशोधन प्रक्रिया के दौरान ज़िंदा मतदाताओं को ‘मृत’ बताकर उनके नाम हटाने की कोशिश की गई। नगांव ज़िले के नगांव–बतद्राबा विधानसभा क्षेत्र में एक ही व्यक्ति ने एक ही पोलिंग बूथ के 64 मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज करा दी, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। नोटिस मिलने के बाद कई लोग खुद दफ्तर पहुंचकर यह साबित करते नज़र आए कि वे पूरी तरह जीवित हैं

इस वोटर लिस्ट गड़बड़ी का मामला उस वक्त और गंभीर हो गया जब सामने आया कि जिन लोगों को मृत बताया गया, उनमें बुज़ुर्ग, सरकारी सेवा से रिटायर्ड कर्मचारी और यहां तक कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ज़्यादातर आपत्तियां एक व्यक्ति—बिशल रॉय—द्वारा दर्ज कराई गईं, जो किसी राजनीतिक दल का अधिकृत बूथ एजेंट भी नहीं बताया जा रहा है।

ज़िंदा लोग, लेकिन रिकॉर्ड में ‘मृत’

पिछले सप्ताह रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हाफिजुद्दीन अहमद को नोटिस मिला कि उन्हें मृत बताकर वोटर लिस्ट से हटाने की मांग की गई है। नोटिस मिलते ही वे ज़रूरी दस्तावेज़ लेकर संबंधित कार्यालय पहुंचे और अपनी पहचान साबित की। अधिकारियों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें भरोसा दिलाया कि उनका नाम सुरक्षित रहेगा। हाफिजुद्दीन अकेले नहीं हैं—दर्जनों लोगों को ऐसे ही नोटिस मिले हैं।

एक अन्य मामले में जावेद अख्तर को दो नोटिस मिले—एक उनके 80 वर्षीय बीमार ससुर के लिए और दूसरा उनकी पत्नी के नाम पर। कहीं ‘मौत’ का कारण लिखा गया, तो कहीं ‘स्थानांतरण’। इसी तरह 77 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर अब्दुल सलाम और उनकी पत्नी को भी मृत बताकर आपत्ति दर्ज की गई, जबकि वे केवल यात्रा पर बाहर गए हुए थे।

प्रशासन ने क्यों रोकी सुनवाई

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नगांव ज़िले के तीन विधानसभा क्षेत्रों—बरहमपुर, नगांव–बतद्राबा और राहा—में सार्वजनिक सुनवाई अस्थायी रूप से रोक दी गई है। ज़िला आयुक्त और ज़िला चुनाव अधिकारी देवाशीष शर्मा ने आदेश जारी कर कहा कि बड़ी संख्या में आ रही शिकायतों और सीमित सुविधाओं के कारण यह कदम उठाया गया है। प्रशासन का दावा है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखी जाएगी और कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर नहीं होगा।

अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि एक साथ बड़ी संख्या में झूठी आपत्तियां आ रही हैं। चुनाव नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज करा सकता है, लेकिन जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।

कानूनी चेतावनी और सज़ा का प्रावधान

नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि झूठी, भ्रामक या परेशान करने वाली आपत्तियां दर्ज कराने वालों पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

अन्य ज़िलों से भी शिकायतें

ऐसी ही शिकायतें लखीमपुर ज़िले से भी सामने आई हैं, जहां ज़िला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि एक व्यक्ति द्वारा कई मतदाताओं पर आपत्ति दर्ज कराना नियमों के ख़िलाफ़ है। चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और राजनीतिक दलों से बातचीत भी की जा रही है।

असम में विशेष संशोधन की स्थिति

असम में चल रही विशेष संशोधन प्रक्रिया के तहत अब तक लाखों प्रविष्टियों की जांच की जा चुकी है। प्रशासन के अनुसार, बड़ी संख्या में मृत, स्थानांतरित और डुप्लिकेट मतदाताओं की पहचान हुई है। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, जिसके बाद अंतिम वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

यह पूरा मामला वोटर लिस्ट की शुद्धता के नाम पर संभावित दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। विपक्ष का आरोप है कि इसके ज़रिये वैध मतदाताओं को बाहर करने की कोशिश हो रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि हर शिकायत की जांच होगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

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