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RG Kar Case IPS Suspension: आरजी कर मामले में तीन IPS अधिकारी सस्पेंड

RG Kar Case IPS Suspension के तहत विनीत गोयल, इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता को निलंबित किया गया। आरजी कर मामले में जांच में लापरवाही और हस्तक्षेप के आरोपों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई।

RG Kar Case IPS Suspension को लेकर सरकार सख्त, विनीत गोयल, इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता पर विभागीय जांच के आदेश

Qalam Times News Network
कोलकाता |16 मई 2026
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चर्चित RG Kar Medical College and Hospital मामले को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आरजी कर अस्पताल में महिला चिकित्सक के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या मामले की जांच में लापरवाही तथा जांच को प्रभावित करने के आरोपों के बीच तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त Vineet Goyal, Indira Mukherjee और Abhishek Gupta शामिल हैं।

RG Kar Case
राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले में सामने आए पुलिस प्रशासन से जुड़े सभी आरोपों की गंभीरता से जांच कराएगी।

RG Kar Case IPS Suspension के पीछे क्या हैं आरोप?

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ हुई कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे पश्चिम बंगाल को झकझोर दिया था। घटना के बाद राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और पुलिस की भूमिका पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे।
उस समय तत्कालीन कोलकाता पुलिस प्रशासन पर आरोप लगा था कि जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाने के बजाय मामले को प्रभावित करने की कोशिश की गई। विपक्षी दलों और वामपंथी संगठनों की ओर से लगातार यह सवाल उठाया गया था कि घटना स्थल पर एक साथ कई लोगों की मौजूदगी क्यों थी और शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज क्यों किया गया।
मामले के दौरान Indira Mukherjee ने कोलकाता पुलिस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। हालांकि उस प्रेस वार्ता में दी गई जानकारी और बाद में सामने आए तथ्यों के बीच कई विरोधाभास देखने को मिले थे, जिसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर और अधिक सवाल खड़े हुए।
पीड़िता के परिवार ने भी उस समय आरोप लगाया था कि शव पर डाली गई चादर को कई बार बदला गया। परिवार का दावा था कि इससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका पैदा हुई। वहीं 14 अगस्त की रात अस्पताल परिसर में हुई तोड़फोड़ और हिंसा के मामले में आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी पुलिस की आलोचना हुई थी।

विरोध करने वालों पर कार्रवाई को लेकर भी उठे थे सवाल

आरजी कर मामले में न्याय की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। आरोप लगाए गए कि आंदोलन में शामिल कुछ लोगों को झूठे मामलों में फंसाया गया। इस संदर्भ में Meenakshi Mukherjee और Kaltan Dasgupta जैसे नाम भी चर्चा में आए थे।
राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा लगातार गर्माता रहा कि उस समय की सरकार और पुलिस प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के बजाय कथित रूप से दबाव की राजनीति अपनाई।

सरकार ने कहा- CBI जांच में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा

मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने स्पष्ट किया है कि महिला चिकित्सक दुष्कर्म और हत्या मामले की मुख्य जांच फिलहाल Central Bureau of Investigation के पास है और राज्य सरकार उसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल उन आरोपों की जांच करेगी जो कोलकाता पुलिस की भूमिका, जांच को प्रभावित करने और कथित रूप से गलत दिशा में ले जाने से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि उस समय के प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर किसने क्या निर्देश दिए थे, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
सरकार ने साफ किया है कि यदि जांच के दौरान किसी पूर्व मंत्री या वरिष्ठ राजनीतिक पदाधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।

RG Kar Case IPS Suspension ने फिर तेज की राजनीतिक बहस

तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के निलंबन के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। विपक्ष इसे देर से उठाया गया लेकिन जरूरी कदम बता रहा है, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आरजी कर कांड पहले ही राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर चुका है। अब RG Kar Case IPS Suspension के बाद इस मामले की राजनीतिक और प्रशासनिक संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

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