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बैटरी डाउन: कस्बा में जावेद खान के सामने विपक्ष पूरी तरह फीका

बैटरी डाउन स्थिति में कस्बा में विपक्ष, जावेद अहमद खान को मिल रहा भारी समर्थन, चाइनीज समुदाय भी सक्रिय।

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
Kolkata, 3 अप्रैल 2026

बैटरी डाउन—कस्बा विधानसभा क्षेत्र में विपक्ष की हालत को लोग इसी एक शब्द में बयान कर रहे हैं। 149 नंबर कस्बा सीट से Javed Ahmed Khan के समर्थन में माहौल इतना मजबूत दिख रहा है कि विरोधी दलों की मौजूदगी लगभग न के बराबर महसूस हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार प्रचार में कोलकाता के चाइनीज समुदाय ने भी खास भूमिका निभाई है।

बायपास कनेक्टर से पार्क सर्कस की ओर जाते हुए तपसिया मोड़ पर एक दीवार लोगों का ध्यान खींच रही है। इस दीवार पर चीनी भाषा में जावेद खान के समर्थन में नारे लिखे गए हैं, जो रंग-बिरंगे फ्लोरोसेंट रंगों में चमकते हैं। स्थानीय चीनी समुदाय के समर्थकों ने अपने पारंपरिक लिपि में अपील लिखी—“वोट देकर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार को जिताएं।” यही दृश्य बताता है कि बैटरी डाउन विपक्ष के बीच जावेद खान की पकड़ कितनी मजबूत है।

खुद जावेद खान भले ही मंदारिन भाषा में पारंगत होने का दावा न करें, लेकिन अपने समर्थकों के साथ दीवार पर रंग भरते हुए उनकी ऊर्जा साफ नजर आती है। तेज धूप में पसीने से भीगे कुर्ते के बावजूद उनका उत्साह कम नहीं हुआ। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने 50,653 वोटों से जीत दर्ज की थी और बाद में लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र में तृणमूल की बढ़त और बढ़ी। इसी आत्मविश्वास के साथ उन्होंने कहा—“इस बार जीत का अंतर और बड़ा होगा।”

स्थानीय लोगों से बात करने पर भी यही तस्वीर सामने आती है। पार्क सर्कस और ढाकुरिया से आए मतदाता खुलकर कहते हैं कि वे सिर्फ “खान साब” को जानते हैं। जब उनसे बीजेपी उम्मीदवार के बारे में पूछा गया, तो जवाब मिला—“यहां कौन खड़ा है, हमें नहीं पता।” वाम दलों और अन्य पार्टियों को लेकर भी लोगों का रुख लगभग यही है।

जावेद खान के करीबी एक कार्यकर्ता ने मुस्कुराते हुए कहा कि जो उम्मीदवार असर नहीं छोड़ पाते, उन्हें वे मजाक में “बैटरी डाउन कैंडिडेट” कहते हैं—और कस्बा में विपक्ष की स्थिति कुछ ऐसी ही है।

चाइनीज समुदाय के सदस्य मार्क वांग बताते हैं कि इलाके के 66 नंबर वार्ड में करीब 800 चीनी मूल के लोग रहते हैं और वे तृणमूल के समर्थन में हैं क्योंकि पार्टी ने हमेशा उनके साथ खड़े रहने का काम किया है। जावेद खान भी जोर देकर कहते हैं कि यह इलाका हर धर्म और समुदाय के लोगों का है, जहां सौहार्द बना हुआ है।

अपने भाषण में उन्होंने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि समय आने पर सत्ता बदलेगी और वही हथियार उनके खिलाफ भी इस्तेमाल होंगे।

इस बीच तृणमूल के स्थानीय नेताओं का दावा है कि इस बार पार्टी पिछली जीत का रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है। उनका लक्ष्य है कि वोटों का अंतर पहले से कहीं ज्यादा हो।

अगर आप चाइना टाउन की ओर बढ़ें और तपसिया मोड़ पर रुककर उस रंगीन दीवार को देखें, तो शायद भाषा समझ न आए—लेकिन माहौल एक ही बात कहता है: यहां चुनावी मैदान में जावेद खान की पकड़ बेहद मजबूत है।

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