रुपया 95 के पार पहुंचा, सरकार बोली रुपया ठीक चल रहा है, जानें पूरी खबर
कलम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता , 31 मार्च 2026
डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक स्तर पर पहुँचा रुपया, सियासी बयानबाज़ी तेज

रुपया एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा ने 95.20 के स्तर को छूकर नया निचला रिकॉर्ड बना दिया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में साफ कहा कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति बेहतर है और रुपया “ठीक चल रहा है”।
हालांकि रुपया की इस गिरावट ने सियासी हलकों में बहस को तेज कर दिया है। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है और पुराने बयानों को सामने लाकर सवाल उठा रहा है। सोमवार को अंतरबैंक बाजार में रुपया 95.20 तक पहुंच गया, जबकि 27 मार्च को यह 94.82 पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों के मुताबिक वेस्ट एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक दबाव इसका प्रमुख कारण है।
वित्त मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कई एशियाई मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं। उन्होंने भारत की मजबूत वित्तीय स्थिति, नियंत्रित राजकोषीय घाटा और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार का हवाला देते हुए भरोसा जताया कि स्थिति संभली हुई है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने 2013 के उस दौर को याद दिलाया जब रुपया 62 के स्तर पर था और उस समय निर्मला सीतारमण ने इसे लेकर गंभीर चिंता जताई थी। कांग्रेस का कहना है कि तब और अब के बयानों में साफ विरोधाभास दिखता है।
2013 में, जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तब बीजेपी के नेता रुपये की गिरावट को लेकर बेहद आक्रामक थे। उस समय नरेंद्र मोदी ने भी कई तीखे बयान दिए थे, जिनमें उन्होंने रुपये को “आईसीयू में” और “टर्मिनल स्टेज” में बताया था। उन्होंने सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था।

अब जब रुपया 95 के पार चला गया है, तो प्रधानमंत्री की ओर से कोई सीधा बयान सामने नहीं आया है। विपक्ष इस चुप्पी को मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार लगातार यह कह रही है कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की स्थिति स्थिर और संतुलित है।
आर्थिक जानकार मानते हैं कि रुपये की गिरावट का असर आयात महंगा होने, महंगाई बढ़ने और विदेशी शिक्षा व यात्रा खर्च पर पड़ सकता है। हालांकि निर्यातकों के लिए यह कुछ हद तक फायदेमंद भी हो सकता है।






