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Homeइस्लामोफोबियाआस्था पर नासिरुद्दीन शाह: बेटे विवान ने तोड़ी चुप्पी

आस्था पर नासिरुद्दीन शाह: बेटे विवान ने तोड़ी चुप्पी

आस्था को लेकर नासिरुद्दीन शाह की सोच क्या है—नास्तिकता, विश्वास या दोनों के बीच की स्थिति? बेटे विवान शाह ने अपने पिता के धार्मिक और आध्यात्मिक नजरिये पर खुलकर बात की।

Qalam Times News Network
मुंबई | 18 जनवरी 2026

आस्था  : नास्तिक या अज्ञेयवादी? पिता के विश्वास को लेकर विवान शाह ने साझा किया निजी अनुभव

आस्था

आस्था—यही वह शब्द है जिसके इर्द-गिर्द दिग्गज अभिनेता नासिरुद्दीन शाह की सोच को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाले नासिरुद्दीन शाह अक्सर आलोचनाओं के केंद्र में रहे हैं। अब पहली बार इस संवेदनशील सवाल पर उनके बेटे, अभिनेता विवान शाह, ने खुलकर अपनी बात रखी है।

विवान शाह का कहना है कि उनके पिता को सीधे तौर पर नास्तिक कहना आसान नहीं है। बातचीत के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि यह सवाल वाकई दिलचस्प है, लेकिन इसका जवाब उतना सीधा नहीं। आस्था का जिक्र करते हुए विवान ने अपने बचपन की एक निजी याद साझा की। उन्होंने बताया कि परीक्षाओं से पहले उनका परिवार अक्सर अजमेर शरीफ दरगाह जाया करता था। वहां वे दुआ करते थे कि परीक्षा में अच्छे अंक आएं। विवान के मुताबिक, उनके पिता ने कभी खुलकर यह नहीं कहा कि वे ईश्वर में विश्वास करते हैं या नहीं।

विवान ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने अपने पिता को इस विषय पर कभी स्पष्ट राय रखते नहीं सुना। न ही उन्होंने खुद उनसे यह सवाल सीधे तौर पर पूछा। उनका मानना है कि नासिरुद्दीन शाह शायद उस मानसिक क्षेत्र में रहते हैं, जहां विश्वास और अविश्वास के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।

इसी वजह से विवान अपने पिता को नास्तिक से अधिक “अज्ञेयवादी” मानते हैं। उनके अनुसार, नासिरुद्दीन शाह न तो पूरी तरह ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं और न ही पूरी तरह नकारते हैं। वे दोनों ध्रुवों के बीच सोचते हैं और सवाल उठाते हैं—और शायद यही उनकी बौद्धिक पहचान है।

कामकाज की बात करें तो विवान शाह ने 2011 में फिल्म सात खून माफ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने विशाल भारद्वाज की कई परियोजनाओं में काम किया और 2014 में हैप्पी न्यू ईयर जैसी बड़ी फिल्म में नजर आए। फिल्मों के साथ-साथ विवान रंगमंच से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।

पिता की तरह ही विवान भी मानते हैं कि सवाल पूछना और संदेह करना जरूरी है। शायद इसी सोच में नासिरुद्दीन शाह की आस्था छिपी है—न पूरी तरह विश्वास में बंधी हुई, न पूरी तरह इनकार में डूबी हुई।

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