निर्वाचन आयोग पर वोटाधिकार छीनने के आरोप के बीच कृष्णनगर की सांसद महुआ मैत्रा ने कड़ा रुख अपनाया, एसआईआर प्रक्रिया और दस्तावेजों की वैधता पर उठाए सवाल।
निर्वाचन आयोग : कृष्णनगर में प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने कहा—बंगाल के मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश, 20 फरवरी को अदालत जाने का ऐलान
Qalam Times News Network
कृष्णनगर | 18 फरवरी 2026
निर्वाचन आयोग को लेकर कृष्णनगर की तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मैत्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की हालिया कार्रवाइयों से बंगाल के लोगों के वोट देने के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। मंगलवार को कृष्णनगर में एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने विस्तार से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। बाद में उन्होंने इस मुद्दे पर एक वीडियो भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया।
सांसद ने कहा कि निर्वाचन आयोग पर सत्तारूढ़ भाजपा का प्रभाव दिख रहा है और एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर मतदाताओं को उलझाया जा रहा है। उनका दावा है कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश में कहा गया था कि एसआईआर के तहत मांगे गए दस्तावेज वैध हैं और मतदाता किसी भी मान्य दस्तावेज को प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके बावजूद अब दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाना संदेह पैदा करता है।
महुआ मैत्रा ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष 27 अक्टूबर को जब बंगाल में एसआईआर की शुरुआत हुई थी, तब जारी दिशा-निर्देशों में सरकार द्वारा दिए गए भूमि या आवास आवंटन प्रमाणपत्रों को मान्य दस्तावेज माना गया था। इसी आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना या ‘बंगालेर बाड़ी’ परियोजना के तहत जारी वित्तीय स्वीकृति पत्र भी वैध माने गए थे। उनका आरोप है कि सुनवाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उन्हीं दस्तावेजों पर आपत्ति जताना उचित नहीं है।
इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस ने 20 फरवरी को अदालत का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है। सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आश्वासन दिया है कि किसी भी नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर मिलकर बंगाल के लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश का आरोप लगाया।
इसी दिन नवद्वीप में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वे उनका स्वागत करती हैं, लेकिन केंद्र के शीर्ष नेता केवल चुनाव के समय ही राज्य में आते हैं। यदि वे पूरे वर्ष जनता के बीच रहें तो बेहतर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मायापुर के अलावा क्षेत्र के अन्य मंदिरों का भी दौरा करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि इन दौरों से चुनावी परिणाम प्रभावित नहीं होंगे।






