एनसीपी विलय पर संकट: शरद पवार ने सुनेत्रा की उप मुख्यमंत्री नियुक्ति से अनजान होने का दावा किया। जानें कैसे एनसीपी के दोनों गुटों के एकीकरण की संभावना खत्म हो गई।
कलम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
बारामती (पुणे), 31 जनवरी 2026

एनसीपी विलय की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने शनिवार को एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की कोई जानकारी नहीं थी। यह जानकारी उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स से मिली।
बारामती में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में शरद पवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पवार परिवार के किसी सदस्य को इस निर्णय के बारे में पूर्व सूचना नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यह फैसला संभवतः प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं द्वारा लिया गया होगा। इस बयान ने एनसीपी विलय की संभावनाओं पर गहरा सवालिया निशान लगा दिया है।
एनसीपी : परिवार में संवादहीनता का खुलासा
शरद पवार के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ किया कि शनिवार शाम होने वाले शपथ समारोह में पवार परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं होगा, क्योंकि न तो उन्हें औपचारिक निमंत्रण मिला और न ही इस विषय पर कोई पारिवारिक चर्चा हुई।
84 वर्षीय दिग्गज नेता ने कहा कि अजित पवार गुट की पार्टी ने स्वतंत्र रूप से यह निर्णय लिया है। यह घटनाक्रम दोनों गुटों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है, जो कभी एक ही पार्टी के अभिन्न अंग थे।
अजित पवार की मृत्यु के बाद बदले समीकरण
28 जनवरी 2026 को एक विमान हादसे में अजित पवार की दुखद मृत्यु के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नाटकीय परिवर्तन देखे जा रहे हैं। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया है और अब उन्हें उप मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्त किया जा रहा है।
शुक्रवार को अजित गुट के विधायकों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर सुनेत्रा को उप मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी। इस कदम से यह स्पष्ट हो गया कि अजित पवार गुट अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखने के लिए दृढ़ संकल्प है।
विलय की योजना और उसका पटरी से उतरना
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार की मृत्यु से पहले दोनों गुटों के विलय पर गंभीर चर्चा चल रही थी। शरद पवार ने स्वयं पुष्टि की कि जनवरी में अजित ने उनसे इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे जैसे नेताओं ने बातचीत की शुरुआत की थी।
12 फरवरी 2026 को विलय की घोषणा की योजना बनाई गई थी, जो शरद पवार के जन्मदिन के अवसर पर एक विशेष उपहार के रूप में पेश की जानी थी। हालांकि, अजित की असामयिक मृत्यु ने इस योजना को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया।
अजित गुट की राजनीतिक रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि सुनेत्रा पवार की ताजपोशी एक सुनियोजित राजनीतिक चाल है। अजित गुट में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे दिग्गज नेता विलय के खिलाफ हैं, क्योंकि इससे उनका प्रभाव कम हो सकता है।
यदि विलय होता, तो पार्टी की बागडोर शरद पवार और सुप्रिया सुले के हाथों में आ जाती, जिससे अजित गुट के नेताओं की स्थिति कमजोर हो जाती। वर्तमान व्यवस्था में वे महाराष्ट्र की सत्ता में भागीदार बने हुए हैं।
2023 से जारी विभाजन की कहानी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में विभाजन 2023 में तब शुरू हुआ जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ महायुति गठबंधन में शामिल होने का निर्णय लिया। वे अपने साथ बड़ी संख्या में विधायकों और नेताओं को ले गए।
चुनाव आयोग ने अजित गुट को आधिकारिक एनसीपी का दर्जा और पार्टी के पारंपरिक घड़ी प्रतीक का अधिकार दिया। शरद पवार को नया चुनाव चिह्न लेना पड़ा और उनका गुट एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नाम से जाना जाने लगा।
परिवार में राजनीतिक दरार
विलय की चर्चा के लिए शरद पवार द्वारा बुलाई गई बैठक में सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ तथा जय ने भाग नहीं लिया। यह घटना परिवार में गहरी खाई को दर्शाती है।
एक ओर शरद पवार, सुप्रिया सुले और रोहित पवार विपक्षी महाविकास अघाड़ी के साथ हैं, वहीं दूसरी ओर सुनेत्रा पवार और अजित गुट के नेता सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल हैं। यह राजनीतिक विभाजन पारिवारिक संबंधों पर भी असर डाल रहा है।
आगे की राह: चुनौतियां और संभावनाएं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुनेत्रा पवार के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद विलय की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। दोनों गुट अब अलग-अलग राजनीतिक दिशाओं में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
शरद पवार ने हालांकि यह भी कहा कि अजित की इच्छा थी कि दोनों गुट फिर से एक हों, और उस इच्छा का सम्मान होना चाहिए। लेकिन वर्तमान घटनाक्रम इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाते।
महाराष्ट्र राजनीति पर प्रभाव
इस घटनाक्रम का महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। सुनेत्रा पवार का उप मुख्यमंत्री बनना पवार परिवार की राजनीतिक विरासत को जारी रखने का प्रयास माना जा रहा है, लेकिन यह पारिवारिक एकता की कीमत पर हो रहा है।
अजित गुट महायुति में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए आक्रामक कदम उठा रहा है, जबकि शरद गुट विपक्ष में महाविकास अघाड़ी को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह राजनीतिक ध्रुवीकरण महाराष्ट्र की भावी राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
शरद पवार का यह बयान कि उन्हें सुनेत्रा के शपथ ग्रहण की जानकारी नहीं थी, एनसीपी के दोनों गुटों के बीच संवादहीनता को स्पष्ट करता है। जो पार्टी कभी एक थी, वह अब दो अलग राजनीतिक इकाइयों में बदल चुकी है। अजित पवार की मृत्यु के बाद विलय की जो उम्मीद जगी थी, वह अब धूमिल होती दिख रही है। महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का यह विभाजन एक नए युग की शुरुआत का संकेत हो सकता है।






