बजट 2026 में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा, जानिए रूट, फायदे और विकास से जुड़ी पूरी जानकारी।
Qalam Times News Network
नई दिल्ली | 1 फरवरी 2026
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर : यात्रा, पर्यावरण और विकास को जोड़ने की नई सरकारी पहल

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में एक अहम घोषणा की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए देश में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का ऐलान किया। सरकार ने इन प्रस्तावित कॉरिडोर को “विकास कनेक्टर” बताते हुए कहा कि इससे न सिर्फ यात्रा का समय घटेगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में स्पष्ट किया कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर्यावरण के अनुकूल यात्री परिवहन प्रणाली का मजबूत विकल्प बनेंगे। इन परियोजनाओं से सड़क और हवाई यातायात पर दबाव कम होगा, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और बड़े शहरों के बीच संपर्क और तेज़ होगा। हालांकि, इन कॉरिडोर के लिए बजट में कितनी राशि तय की गई है, इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है।
पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार पर सवाल
गौरतलब है कि भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर 14 सितंबर 2017 को शुरू हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इसकी आधारशिला रखी थी। करीब 9 साल बीत जाने के बावजूद यह परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है। ताज़ा अनुमान के मुताबिक यह प्रोजेक्ट 2029 में शुरू हो सकता है, यानी इसे पूरा होने में लगभग एक दशक लग जाएगा। ऐसे में नए घोषित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की समय-सीमा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और शहरों के विकास को मिलेगा बढ़ावा
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर केवल तेज़ ट्रेनें नहीं हैं, बल्कि यह बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजना है। जब किसी क्षेत्र में रेल कॉरिडोर बनता है, तो उसके आसपास निर्माण, आवास, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। छोटे और मझोले शहरों में भी विकास की रफ्तार तेज़ होती है।
प्रस्तावित 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की सूची
दक्षिण भारत के 5 कॉरिडोर
- मुंबई–पुणे कॉरिडोर
देश की वित्तीय राजधानी और शिक्षा-आईटी हब के बीच यात्रा में क्रांतिकारी बदलाव, छात्रों और पेशेवरों को बड़ी राहत। - पुणे–हैदराबाद कॉरिडोर
स्टार्टअप और फार्मा हब को जोड़ते हुए पश्चिम और दक्षिण भारत के बीच आर्थिक गतिविधियों को मजबूती। - हैदराबाद–बेंगलुरु कॉरिडोर
दो बड़े आईटी केंद्रों को जोड़ने वाला रूट, जो उड़ानों का तेज़ विकल्प बनेगा। - हैदराबाद–चेन्नई कॉरिडोर
व्यापारिक और औद्योगिक शहरों को जोड़कर छोटी दूरी की उड़ानों पर निर्भरता कम करेगा। - चेन्नई–बेंगलुरु कॉरिडोर
यात्रा समय में भारी कमी, आईटी, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को फायदा।
उत्तर भारत के 2 कॉरिडोर
- दिल्ली–वाराणसी कॉरिडोर
राजधानी को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और व्यापारिक केंद्र से जोड़ेगा। - वाराणसी–सिलीगुड़ी कॉरिडोर
पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्व के बीच संपर्क मजबूत करेगा, सिलीगुड़ी को गेटवे के रूप में विकसित करेगा।
इन योजनाओं से कर्नाटक को विशेष फायदा होने की संभावना है, क्योंकि बेंगलुरु दो बड़े हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़ेगा। इससे टेक इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स और कारोबारी गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
रेलवे बजट में हाई-स्पीड रेल के साथ-साथ कवच सुरक्षा प्रणाली, वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों जैसे आधुनिक प्रोजेक्ट्स पर भी ज़ोर दिया गया है। सरकार का दावा है कि ये पहल भारतीय रेलवे को वैश्विक मानकों के करीब ले जाएंगी।
बजट 2026 में घोषित ये हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत के रेल नेटवर्क को आधुनिक और तेज़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। हालांकि, जब तक इनके लिए स्पष्ट निवेश और समय-सीमा सामने नहीं आती, तब तक इन्हें एक महत्वाकांक्षी घोषणा के तौर पर ही देखा जाएगा।
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