ऋतब्रत बनर्जी रैली में 1993 गोलीकांड आयोग की रिपोर्ट, ममता बनर्जी के जवाब, चुनाव चिह्न विवाद, विपक्ष पर हमले और बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर प्रमुख मुद्दे रहे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Qalam Times News Network
कोलकाता | 21 जुलाई 2026
आयोग की रिपोर्ट, ममता का जवाब और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
ऋतब्रत बनर्जी रैली के साथ पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई की राजनीति इस बार दो अलग-अलग मंचों के जरिए नए राजनीतिक संदेशों की गवाह बनी। एक ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में 1993 के गोलीकांड, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट और जवाबदेही के मुद्दे उठे, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने पारंपरिक शहीद दिवस मंच से भाजपा और विरोधी गुटों पर तीखा हमला बोला।

ऋतब्रत बनर्जी रैली के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सत्ता में आने से पहले 1993 के दोषियों को सजा दिलाने का वादा किया था, लेकिन वर्षों बाद भी न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने सवाल किया कि रिपोर्ट को आखिर क्यों दबाकर रखा गया और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने भी आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक न किए जाने की निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं 1993 के शहीदों के परिजनों के एक वर्ग ने भी वर्षों से न्याय नहीं मिलने पर निराशा व्यक्त की। कुछ परिवारों ने इस बार किसी भी शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल न होने का फैसला लिया, जबकि अन्य परिवार दोनों पक्षों के मंचों पर पहुंचे।
ऋतब्रत बनर्जी के मंच पर तृणमूल कांग्रेस के कई पुराने नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। पूर्व मेयर कृष्णा चक्रवर्ती, विधायक मदन मित्र समेत कई नेताओं की उपस्थिति को संगठन के भीतर बदलते समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।
उधर, ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि पार्टी पहले से अधिक मजबूत है और सांसदों की संख्या भी बढ़ी है। उन्होंने विरोधी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी को तृणमूल कांग्रेस पर भरोसा नहीं है तो वह सीधे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी में नई पीढ़ी के छात्र और युवा कार्यकर्ता संगठन को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
मुख्यमंत्री ने चुनाव चिह्न को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न छीनने की कोशिश की गई तो वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगी और किसी भी कीमत पर पार्टी की पहचान को कमजोर नहीं होने देंगी।
चुनाव चिह्न, संगठनात्मक संदेश और आगे की राजनीतिक चुनौती

ममता बनर्जी ने अपने भाषण में भाजपा पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर हमला बोला और कहा कि उनका संघर्ष केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर वह दिल्ली जाकर ककरोच जनता पार्टी के आंदोलन में भी शामिल हो सकती हैं।
दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों ने संगठन से दूरी बनाई है, उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से ऐसे नेताओं से सतर्क रहने की अपील की।
सभा के दौरान मंच पर कुछ असहज क्षण भी देखने को मिले। कल्याण बनर्जी के लंबे भाषण पर ममता बनर्जी ने उन्हें संक्षिप्त रहने का संकेत दिया, जिसके बाद कुछ समय के लिए मंच पर नाराजगी का माहौल बन गया। वहीं मदन मित्र ने सार्वजनिक रूप से कुछ नेताओं से अभिषेक बनर्जी का साथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में लौटने की अपील की।
दोनों कार्यक्रमों में शहीद परिवारों की मौजूदगी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही। ममता बनर्जी के मंच पर 13 शहीद परिवार शामिल हुए, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के कार्यक्रम में चार शहीद परिवारों ने भाग लिया। जिलों से आए कार्यकर्ताओं के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था भी की गई थी।

21 जुलाई के इन समानांतर कार्यक्रमों ने स्पष्ट कर दिया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब केवल अतीत की स्मृतियों तक सीमित नहीं है। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट, संगठनात्मक असंतोष, चुनाव चिह्न का विवाद और बदलते राजनीतिक समीकरण आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। अब सबकी निगाह इस बात पर रहेगी कि इन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों का असर संगठन, जनता और आने वाले चुनावी परिदृश्य पर किस प्रकार पड़ता है।







