नंदीग्राम उपचुनाव की तस्वीर साफ। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट रखने का फैसला किया, जिसके बाद नंदीग्राम में उपचुनाव तय हो गया। भाजपा उम्मीदवार को लेकर चर्चाएं तेज।
दो सीटों से जीतने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ी, अब भाजपा उम्मीदवार को लेकर चर्चाएं तेज
Qalam Times News Network
कोलकाता | 13 मई 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। नंदीग्राम उपचुनाव अब तय माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधानसभा सीट अपने पास रखने का फैसला किया है। बुधवार को विधानसभा में नव-निर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान उन्होंने भवानीपुर के विधायक के रूप में शपथ ली। प्रोटेम स्पीकर तापस रॉय ने उन्हें शपथ दिलाई।

शुभेंदु अधिकारी हालिया विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर—दोनों सीटों से विजयी हुए थे। नियमों के अनुसार किसी भी विधायक को एक ही सीट बरकरार रखने की अनुमति होती है। ऐसे में नंदीग्राम उपचुनाव होना तय हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस हाई-प्रोफाइल सीट से भाजपा किसे उम्मीदवार बनाएगी। राजनीतिक गलियारों में फिलहाल भाजपा के जिला महासचिव और शुभेंदु अधिकारी के करीबी माने जाने वाले मेघनाद पाल का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
शुभेंदु अधिकारी 2016 से नंदीग्राम के विधायक रहे हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2021 और 2026 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में लगातार दो बार इस सीट पर जीत दर्ज की। खासकर 2021 के चुनाव में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पहचान बनाई थी। उसी जीत के बाद उन्हें ‘जायंट किलर’ के रूप में भी जाना जाने लगा।
इस बार के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर—दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था। नंदीग्राम में उन्होंने 9,665 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं भवानीपुर सीट पर भी उन्होंने ममता बनर्जी को पराजित किया। चूंकि कानून के तहत कोई भी नेता एक साथ दो सीटों से विधायक नहीं रह सकता, इसलिए उन्हें एक सीट छोड़नी ही थी। आखिरकार उन्होंने भवानीपुर को चुना और नंदीग्राम सीट खाली करने का निर्णय लिया।
अब सबकी नजरें आने वाले नंदीग्राम उपचुनाव पर टिकी हैं, जिसे राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।







