बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद के ऐलान पर MLA हुमायूं कबीर टीएमसी से निलंबित, अब 22 दिसंबर को नई पार्टी लॉन्च करने की तैयारी। पूरा राजनीतिक घटनाक्रम पढ़ें Qalam Times News Network के साथ।
By Qalam Times News Network | Kolkata | 05 दिसम्बर 2025
नई पार्टी को लेकर उठी इस हलचल ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को हिला दिया है। इसी नई पार्टी विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस ने भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर को निलंबित कर दिया। मामला उस वक्त भड़का, जब कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक नई मस्जिद का शिलान्यास करने का एलान किया। यही बयान उनके निलंबन की सीधी वजह बना।
टीएमसी का रुख: ‘सांप्रदायिक राजनीति बर्दाश्त नहीं’
कोलकाता के मेयर फ़रहाद हाकिम ने कहा कि कबीर का बयान पार्टी की सोच और धर्मनिरपेक्ष चरित्र के खिलाफ था।उनके अनुसार, बाबरी मस्जिद जैसा संवेदनशील मुद्दा उठाकर राजनीतिक हवा बनाना पार्टी-विरोधी गतिविधि है। चेतावनियों के बावजूद कबीर अपने रुख पर अड़े रहे। इस निलंबन के ठीक बाद कबीर ने साफ कर दिया कि वे अब टीएमसी में नहीं रहेंगे और अपनी नई पार्टी बनाने की तैयारी पूरी कर चुके हैं।
कबीर का जवाब: “ममता मुसलमानों को धोखा दे रही हैं”

कबीर ने निलंबन को अपमान बताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला किया। उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक कार्यक्रमों में भेदभाव कर रही है और मुसलमानों को सिर्फ औपचारिकता के तौर पर भत्ता दिया जा रहा है। कबीर ने ऐलान किया कि वे शुक्रवार को टीएमसी छोड़ेंगे और 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी लॉन्च करेंगे—एक ऐसी पार्टी जो सभी समुदायों की राजनीति करेगी।
नई पार्टी की तैयारी: 135 सीटों पर उतरने का दावा
कबीर का दावा है कि वे 2026 के विधानसभा चुनाव में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे और टीएमसी व बीजेपी दोनों को चुनौती देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बाबरी मॉडल की प्रस्तावित मस्जिद का 6 दिसंबर वाला कार्यक्रम हर हाल में होगा और बड़ी भीड़ आने की संभावना है, जिससे NH-12 पर असर पड़ सकता है।
हुमायूं कबीर: विवाद और दल-बदल की कहानी
- 2012 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में आए और मंत्री बने।
- 2019 में बीजेपी में शामिल होकर लोकसभा चुनाव लड़ा, हार मिली।
- 2021 से पहले दोबारा टीएमसी में लौटे और भरतपुर से जीत हासिल की।
- हाल के महीनों में कई बार उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ बयान देकर नेतृत्व को नाराज़ किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दे और कबीर की नई पार्टी का उभरना, खासकर मुर्शिदाबाद क्षेत्र में, टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। अगर नई पार्टी थोड़ी भी पकड़ बनाती है, तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है—जो बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकता है।






