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‘विश्व गुरु’: इज़राइल का मोहरा, दिल्ली की कूटनीतिक अंधता और पश्चिम एशिया का खूनी खेल

विश्व गुरु की भूमिका पर उठते सवाल: इज़राइल दौरे के बाद भारत की विदेश नीति, ईरान संकट, तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर संभावित असर का विस्तृत विश्लेषण।

Dr. Mohammad Farooque
Qalam Times News Network
Kolkata, 03 मार्च 2026

विश्व गुरु : भारत की विदेश नीति पर उठते सवाल, पश्चिम एशिया संकट और आर्थिक आशंकाएँ

विश्व गुरु

विश्व गुरु बनने का दावा करने वाला भारत आज एक गंभीर कूटनीतिक विवाद के केंद्र में खड़ा दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया इज़राइल दौरा आलोचकों की नजर में एक ऐसी रणनीतिक भूल के रूप में देखा जा रहा है, जिसने भारत की वैश्विक छवि पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। तेल अवीव की संसद में इज़राइली नेतृत्व के प्रति खुला समर्थन व्यक्त करना उस समय हुआ जब क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर था। इसके तुरंत बाद ईरान में शीर्ष नेतृत्व पर हमले की खबरों ने हालात को और विस्फोटक बना दिया। आलोचकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की संतुलित विदेश नीति की परंपरा को कमजोर किया है।

दूसरी ओर, इज़राइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाइयों का दायरा ग़ज़ा से आगे बढ़ते हुए ईरान तक फैल गया है। हालिया हमलों में स्कूलों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की है। ऐसे समय में विश्व गुरु की भूमिका निभाने का दावा करने वाले भारत से संतुलित और मानवीय रुख की अपेक्षा की जा रही थी। ईरान, जिसने चाबहार बंदरगाह परियोजना के माध्यम से भारत को मध्य एशिया और यूरोप तक व्यापारिक पहुंच दी, अब इस नए समीकरण में असहज स्थिति में दिख रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह रुख दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान आता है, तो भारत की लगभग दो-तिहाई तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे महंगाई बढ़ने और बाजारों में अस्थिरता की आशंका है। उड़ानों की रद्दीकरण और क्षेत्र में बसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। शेयर बाजार में गिरावट और विदेशी निवेश में कमी जैसे संकेत आर्थिक दबाव की ओर इशारा करते हैं।

सरकार की ओर से शांति और संयम की अपील जारी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक संतुलन और व्यावहारिक रणनीति ही स्थिति को संभाल सकती है।

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