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वंदे मातरम विवाद: क्या बंकिम चंद्र को ‘बंकिम दा’ कहना बीजेपी को बंगाल में भारी पड़ेगा?

वंदे मातरम विवाद ने बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है। TMC ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को “बंकिम दा” कहने को सांस्कृतिक अपमान बताया। Qalam Times आपके लिए लाया है पूरा विश्लेषण।

Qalam Times News Network
नई दिल्ली | 9 दिसम्बर 2025

वंदे मातरम को लेकर छिड़ी बहस सोमवार को लोकसभा में उस समय और तेज हो गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके रचनाकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को संबोधित करते हुए “बंकिम दा” शब्द का प्रयोग किया। TMC नेताओं ने इसे न सिर्फ “अनुचित” कहा बल्कि आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने महान साहित्यकार का वह सम्मान नहीं दिया, जिसकी बंगाल अपेक्षा करता है। तृणमूल का दावा है कि वंदे मातरम को राजनीतिक मोड़ देने का यह प्रयास भाजपा को 2026 के विधानसभा चुनाव में उलटा पड़ सकता है।

TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन अत्यधिक अनौपचारिक था, मानो किसी सामान्य बातचीत के दौरान लिया गया नाम हो। उनके मुताबिक, बंगाल हमेशा अपने विचारकों, कवियों और स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों के प्रति संवेदनशील रहा है, और वंदे मातरम के लेखक के प्रति ऐसा रवैया राज्य को स्वीकार नहीं।

दस्तीदार ने यह भी याद दिलाया कि वंदे मातरम सिर्फ गीत नहीं, बल्कि उस स्वतंत्रता चेतना का प्रतीक है जिसे लाखों लोगों ने अपनी आवाज़ से मजबूत किया था। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि बंगाल लेखक के प्रति इस तरह के उल्लेख को अपमान समझता है और इसे भुलाया नहीं जाएगा।

TMC का तर्क है कि भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए वंदे मातरम पर बहस की रणनीति बनाई, लेकिन प्रधानमंत्री की टिप्पणी ने इस मुद्दे को उनके खिलाफ मोड़ दिया।
दस्तीदार ने यह भी कहा कि बंगाल “जस्टिस” की मांग करना जानता है—चाहे वह विद्यासागर की प्रतिमा तोड़े जाने का मामला हो या अब का यह सांस्कृतिक विवाद।TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने इस बहस को “खराब लिखी कॉमेडी” बताते हुए केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह बेरोजगारी, प्रदूषण और राज्यों को फंड रोके जाने जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है।

उन्होंने संसद बुलेटिन का हवाला देते हुए कहा कि अभी दो सप्ताह पहले तक ‘वंदे मातरम’ को नारा लगाना कार्यवाही की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा था, और अचानक सरकार ने इस पर दस घंटे की बहस को अत्यावश्यक समझ लिया।
मोइत्रा के अनुसार, इसका मकसद साफ है—2026 के चुनाव से पहले बंगाल में राजनीतिक लाभ लेना।

2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने 294 में से 213 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा 77 पर सिमट गई थी। अगले चुनाव अब बहुत दूर नहीं हैं और ऐसे में वंदे मातरम को लेकर उठा विवाद राजनीतिक तापमान को और बढ़ाता दिख रहा है।

 

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