पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हुई 39 मौतों को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग और सीईसी पर गंभीर आरोप लगाए। क्या बंगाली मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली | 29 नवंबर 2025
तृणमूल का सीधा निशाना—“आपके हाथों पर खून है”
आरोप लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया ने जान ले ली है—और इसकी जवाबदेही से कोई नहीं बच सकता। पार्टी के दस सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में पूर्ण आयोग से डेढ़ घंटे की मुलाकात में ये बात सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कह दी।
तृणमूल नेताओं के अनुसार, एसआईआर के दौरान अव्यवस्थित काम, अत्यधिक दबाव और अपर्याप्त तैयारी ने 39 लोगों की जान ले ली, जिनमें बूथ लेवल ऑफिसर भी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इतने बड़े नुकसान का दोष किसके सिर जाएगा—चुनाव आयोग या उसके प्रमुख?
बंगाली मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप
दूसरे ही पैराग्राफ में पार्टी ने दो टूक कहा कि एसआईआर का इस्तेमाल बंगाली भाषी मतदाताओं को अलग-थलग करने के लिए किया जा रहा है। तृणमूल के नेताओं—डेरेक ओ’ब्रायन और महुआ मोइत्रा—ने दावा किया कि जिन राज्यों में वास्तविक घुसपैठ की समस्या है, उन्हें प्रक्रिया से बाहर रखा गया, लेकिन बंगाल और यूपी में व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
उनका सवाल था कि जिन वोटर लिस्ट को 2024 में ईसीआई ने सही बताया था, वे अचानक अविश्वसनीय कैसे हो गईं?
बीएलए नियम बदलने पर राजनीतिक हलचल
पार्टी ने बीएलए नियुक्ति नियम में हुए बदलाव को भी पक्षपातपूर्ण बताया। पहले एजेंट को उसी बूथ का मतदाता होना जरूरी था, अब पूरे विधानसभा क्षेत्र से किसी भी बूथ का व्यक्ति नियुक्त किया जा सकता है। तृणमूल का दावा है कि इससे भाजपा को बड़ा फायदा मिलेगा क्योंकि वह आसानी से अपने कार्यकर्ताओं को हर जगह तैनात कर सकेगी।
“एक करोड़ नाम हटाने” की चेतावनी पर चुप क्यों है ईसीआई?
तृणमूल ने आरोप लगाया कि बंगाल बीजेपी के कई नेता खुलेआम कह रहे हैं कि एसआईआर में एक करोड़ नाम हटाए जाएंगे—और आयोग इस बयानबाज़ी पर खामोश है। डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि यह खामोशी खुद एक संदेश देती है कि क्या संस्थाएँ किसी एक राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रही हैं?
अभी तक आयोग की प्रतिक्रिया नहीं
तृणमूल के सभी गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। वहीं एसआईआर का दूसरा चरण देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तृणमूल इस मुद्दे को 2026 के विधानसभा चुनावों में “बंगाली अस्मिता” के तौर पर उठाने की तैयारी कर रही है।






