SIR Controversy के बीच तीन और बीएलओ की मौत से तनाव बढ़ा। ममता बनर्जी और अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। SIR अभियान की गति, दबाव और राजनीतिक टकराव पर विस्तृत रिपोर्ट।
क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
डेटलाइन: कोलकाता | 23 नवंबर 2025
मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा
SIR अभियान को लेकर उठ रहा विवाद शनिवार को और भारी हो गया, जब पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में तीन और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की मौत हो गई। इस तरह अभियान शुरू होने के बाद अब तक कुल आठ BLO अपनी जान गंवा चुके हैं। लगातार हो रही मौतों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है—ममता बनर्जी के बाद अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नादिया, दमोह, रायसेन—तीन जगह, तीन घटनाएँ
पश्चिम बंगाल के नादिया ज़िले में 51 वर्षीय शिक्षिका रिंकी तारफदार का शव उनके घर में फंदे से लटका मिला। परिवार का कहना है कि SIR के बेतहाशा काम के दबाव ने उन्हें तोड़ दिया। उनके पास से मिला सुसाइड नोट भी इसी ओर इशारा करता है—उन्होंने लिखा कि “मैं साधारण इंसान हूँ, इतना अन्यायपूर्ण बोझ नहीं झेल सकती।”

मध्य प्रदेश में रायसेन के रमाकांत पांडेय और दमोह के सीताराम गोंड की भी मौत हो गई। एक अन्य BLO नारायण दास सोनी छह दिनों से लापता हैं। रमाकांत पांडेय की पत्नी ने आरोप लगाया कि वे रात-रात भर जागकर काम कर रहे थे और इसी तनाव में उनकी हालत बिगड़ गई।
गुजरात के कापडवंज में 50 वर्षीय शिक्षक रमेशभाई परमार की भी शुक्रवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। केरल और राजस्थान में पहले ही एक-एक BLO की जान जा चुकी है। सभी परिवारों की एक ही शिकायत है—अमानवीय काम का बोझ।
बंगाल में गुस्सा, सड़क पर उतरे BLO
BLO समुदाय इस समय सबसे ज़्यादा हताश दिख रहा है। फॉर्म भरने से लेकर घर-घर सत्यापन और डिजिटल एंट्री तक, लंबा काम, यात्रा और लगातार डेडलाइन ने लोगों की ज़िंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है।
कोलकाता के बेलियाघाटा में सात BLO को डिजिटल एंट्री में मामूली गलती पर नोटिस मिला—इससे तनाव और बढ़ा। पूर्वी वर्धमान के कटवा में BLO सड़क पर उतर आए और पूछा—“हम कब तक इस तरह काम करते रहेंगे?”
ममता बनर्जी ने सीधे चुनाव आयोग से सवाल दागा—“और कितनी जानें जाएँगी? इस प्रक्रिया के लिए हमें और कितनी लाशें देखनी होंगी?”
इसी बीच गुजरात के शिक्षक संगठनों ने मृत BLO के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देने की मांग रखी है। वहीं यूपी के पीलीभीत में प्रशासन ने तनाव कम करने के लिए BLO को ‘प्रोत्साहन’ के नाम पर सर्टिफिकेट और फैमिली ट्रिप की घोषणा की है।
चुनाव आयोग दबाव में
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने नादिया प्रशासन से तत्काल रिपोर्ट मांगी है। ECI ने भी डीएम से फोन पर बात की है। जलपाईगुड़ी में हुई BLO की मौत पर अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। अग्रवाल ने कहा कि “99% BLO सुबह से रात तक लगातार काम कर रहे हैं और पूरा SIR अभियान इन्हीं पर टिका हुआ है।”
अखिलेश यादव का दावा—1.5 से 2 करोड़ वोट काटे जा सकते हैं
लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि SIR के जरिए यूपी में करीब दो करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश हो रही है। उनका आरोप है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जहां INDIA गठबंधन जीता था, उन विधानसभा क्षेत्रों में 50,000 तक नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा—“अगर कोई लखनऊ में आराम करता मिला, उसकी टिकट तुरंत कटेगी। जाकर अपने इलाके में SIR की निगरानी करो—गड़बड़ी मिली तो अधिकारी हो या नेता, जेल भेजा जाएगा।”
दो महीने में तीन साल का काम
मतदाता सूची का यह विशेष गहन संशोधन (SIR) पहले तीन साल में पूरा होता था, लेकिन इस बार इसे दो महीने में निपटाने का दबाव है—और वह भी 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले।
टीएमसी इसे “मानवीय त्रासदी” बता रही है, जबकि बीजेपी राज्य सरकारों को दोष दे रही है।
और चुनाव आयोग? संकेत यही हैं कि अभियान रोका नहीं जाएगा।






