मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश के आरोपों के बीच शिवतीर्थ पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की ऐतिहासिक सभा, मराठी अस्मिता और मुंबई की रक्षा का आह्वान, भाजपा और फडणवीस सरकार पर तीखा हमला – पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
संवाददाता, क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई | 11 जनवरी 2026
मराठी अस्मिता और मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की कथित साजिश के खिलाफ एकजुट हुआ जनसमूह, भाजपा और फडणवीस सरकार पर तीखा हमला

मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश रचे जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुंबईकरों से एकजुट होने की भावुक अपील की। दोनों नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि संकट अब दूर नहीं, बल्कि सीधे मराठी माणुस के दरवाजे तक पहुंच चुका है। अगर अभी आवाज़ नहीं उठाई गई, तो कब घर से बाहर कर दिया जाएगा, इसका अंदाज़ा भी नहीं लगेगा। उन्होंने आह्वान किया कि खून-पसीने से हासिल की गई मुंबई को न तो तोड़ने दिया जाएगा, न लूटने दिया जाएगा और न ही किसी के सामने झुकने दिया जाएगा।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव प्रचार के तहत ऐतिहासिक शिवतीर्थ पर आयोजित शिवसेना-मनसे-राष्ट्रवादी कांग्रेस की संयुक्त ‘शिवशक्ति’ सभा में यह चेतावनी और भी तीखे रूप में सामने आई। इस विशाल जनसभा में लाखों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। दूसरे ही क्षणों में पूरा शिवतीर्थ “मुंबई हमारी है” जैसे नारों से गूंज उठा। इसी सभा में उद्धव और राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी उद्योगपतियों के इशारे पर मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
नाचते-गाते पहुंचे शिवशक्ति के सिपाही
इस ऐतिहासिक सभा का गवाह बनने के लिए मुंबई शहर और उपनगरों से शिवशक्ति के लाखों कार्यकर्ता शिवतीर्थ पहुंचे। हर ओर शिवसेना की मशाल और मनसे के इंजन चिन्ह वाले झंडे लहराते दिखे। कई कार्यकर्ता हाथों में जलती मशालें लेकर पहुंचे, तो कई ढोल-ताशों की गूंज पर नाचते हुए, गगनभेदी नारों के साथ सभा स्थल तक आए। सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि राज्य के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग ठाकरे बंधुओं को एक मंच पर देखने पहुंचे थे। यह सभा भीड़ के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ती नजर आई।
सभा को संबोधित करते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ चुनावी मंच नहीं, बल्कि मुंबई की आत्मा की रक्षा का आंदोलन है। मराठी माणुस ने जिस संघर्ष से इस शहर को अपना बनाया है, उसे किसी सौदे, किसी राजनीतिक चाल या किसी कॉर्पोरेट दबाव में खोने नहीं दिया जाएगा। इस संदेश के साथ लाखों हाथ हवा में उठे और भींची हुई मुट्ठियों ने संकल्प लिया कि मुंबई की पहचान, संस्कृति और अधिकार की रक्षा के लिए आख़िरी दम तक लड़ाई लड़ी जाएगी।






