मुकुल राय का 73 वर्ष की आयु में निधन। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ तृणमूल नेता लंबे समय से बीमार थे। कोलकाता में हृदयाघात से अंतिम सांस ली। उनके राजनीतिक जीवन और विवादों पर विस्तृत रिपोर्ट।
दो दशक तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे वरिष्ठ नेता मुकुल राय, लंबी बीमारी के बाद कोलकाता में निधन
Qalam Times News Network
कोलकाता | 23 फरवरी 2026
मुकुल राय अब हमारे बीच नहीं रहे। 73 वर्ष की आयु में उन्होंने देर रात कोलकाता के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। पिछले काफी समय से वे गंभीर रूप से अस्वस्थ थे और बाइपास के पास स्थित एक अस्पताल में लगभग 600 दिनों से भर्ती थे। बताया जा रहा है कि हृदयाघात के चलते उनका निधन हुआ। उनके जाने से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
राजनीतिक जीवन की बात करें तो मुकुल राय ने 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वे पार्टी के पहले अखिल भारतीय महासचिव बने और रणनीतिक सूझबूझ के कारण उन्हें राजनीतिक गलियारों में “तृणमूल का चाणक्य” कहा जाता था। वे ममता बनर्जी के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते थे। राज्यसभा सदस्य रहने के साथ-साथ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में उन्होंने जहाजरानी राज्य मंत्री का दायित्व संभाला। बाद में उन्हें केंद्र में रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
साल 2018 में उन्होंने अचानक तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। 2021 के विधानसभा चुनाव में वे कृष्णानगर उत्तर सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए। हालांकि भाजपा के साथ उनका संबंध लंबा नहीं चला और उसी वर्ष वे पुनः तृणमूल कांग्रेस में लौट आए।
उनकी वापसी के बाद दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी विधायक सदस्यता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा पद समाप्त करने से इनकार किए जाने पर मामला कोलकाता हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने उनकी सदस्यता रद्द करने का आदेश दिया, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। मामला अब भी न्यायालय में लंबित है और वे तकनीकी रूप से कृष्णानगर उत्तर के विधायक बने हुए थे।
पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य कारणों से वे सक्रिय राजनीति से दूर थे। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी गहरा दुख जताते हुए उन्हें लंबे समय का राजनीतिक सहयोगी बताया। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।






