Mamata PM Debate तेज, संजय बारू ने ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त बताया। भाजपा, कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के बीच नए राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा।
Mamata PM Debate : संजय बारू ने ममता बनर्जी को बताया प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त चेहरा, विपक्षी राजनीति में नई बहस शुरू
Qalam Times News Network
नई दिल्ली | 17 फरवरी 2026

Mamata PM Debate ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू ने एक लेख में साफ शब्दों में कहा है कि देश में लंबे समय से किसी महिला ने प्रधानमंत्री पद नहीं संभाला है और इस खालीपन को भरने की क्षमता अगर किसी में दिखती है तो वह Mamata Banerjee हैं।
सोमवार को प्रकाशित अपने लेख में बारू ने ममता को पूरी तरह “सेल्फ मेड” नेता बताया। उनका कहना है कि मौजूदा समय में वह देश की एकमात्र ऐसी महिला हैं जो एक साथ अपनी राजनीतिक पार्टी और राज्य सरकार दोनों का नेतृत्व कर रही हैं। Mamata PM Debate को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने लिखा कि राजनीतिक स्वीकार्यता और प्रशासनिक अनुभव—दोनों ही पैमानों पर ममता सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरती हैं।
महिला नेतृत्व बनाम पुरुष-प्रधान राजनीति

बारू ने अपने तर्क को सिर्फ प्रतीकात्मक महिला प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ Bharatiya Janata Party की संरचना मुख्यतः पुरुष नेतृत्व पर आधारित है। ऐसे में अगर विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक एक सशक्त और स्वतंत्र महिला चेहरे को आगे करता है, तो यह रणनीतिक रूप से भाजपा के महिला वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले West Bengal Assembly Election से पहले राष्ट्रीय स्तर पर ममता की भूमिका पर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। भाजपा के खिलाफ उनकी आक्रामक राजनीतिक शैली ने उन्हें राज्य की सीमाओं से बाहर भी एक प्रमुख विपक्षी आवाज के रूप में स्थापित किया है।
कांग्रेस मॉडल पर सवाल
बारू ने अपने लेख में कांग्रेस की रणनीति पर भी अप्रत्यक्ष सवाल उठाए। उनके अनुसार, वर्षों तक कांग्रेस ने जो “सोनिया-मनमोहन मॉडल” अपनाया, उसी ढांचे को अब Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge के नेतृत्व में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है। लेकिन यह मॉडल प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली भाजपा को प्रभावी चुनौती देने में सफल नहीं रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस टिप्पणी ने कांग्रेस-केंद्रित विपक्षी राजनीति से हटकर क्षेत्रीय दलों को केंद्र में लाने की बहस को नई ऊर्जा दी है। अगर विपक्षी खेमे में नेतृत्व को लेकर पुनर्विचार होता है, तो उसके केंद्र में ममता बनर्जी का नाम प्रमुखता से उभर सकता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बारू की राय औपचारिक राजनीतिक प्रस्ताव का रूप लेगी या नहीं। लेकिन इतना तय है कि Mamata PM Debate ने विपक्षी खेमे में नेतृत्व को लेकर नए समीकरणों की चर्चा को हवा दे दी है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।






