कूटनीति के जरिए भारत-ईरान वार्ता, मध्य पूर्व संकट, शांति की अपील और वैश्विक सुरक्षा पर चर्चा।
कूटनीति : मध्य पूर्व संकट के बीच भारत और ईरान की बातचीत, वैश्विक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता
Qalam Times News Network
Kolkata, March 22, 2026

कूटनीति एक बार फिर वैश्विक तनाव के बीच सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच हालिया टेलीफोन वार्ता में शांति, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में संघर्ष तेजी से गहराता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है।
इस वार्ता में ईरान ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का हवाला देते हुए समूह से स्वतंत्र भूमिका निभाने और अपने खिलाफ हो रहे हमलों को रोकने की अपील की। कूटनीति के इसी संदर्भ में ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और इज़राइल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन हमलों में निर्दोष नागरिकों, सैन्य अधिकारियों और यहां तक कि स्कूली बच्चों की भी जान गई है। उन्होंने विशेष रूप से मिनाब में एक स्कूल पर हुए हमले को बेहद दुखद बताते हुए इसे संघर्ष का सबसे गंभीर मानवीय पहलू बताया।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने युद्ध की शुरुआत नहीं की और वह परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों को खारिज करता है। साथ ही, उसने यह प्रस्ताव रखा कि पश्चिम एशिया के देशों को मिलकर एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा तैयार करना चाहिए, ताकि बाहरी हस्तक्षेप के बिना शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत के दौरान ऊर्जा ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि इससे वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध किसी के हित में नहीं होता और सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत ने इस संकट के बीच संवाद और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने का संकेत भी दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि जहां एक ओर सैन्य तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो रहे हैं। भारत जैसे देश इस संतुलन को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक संकट में न बदल जाए।
अंततः, मौजूदा परिस्थितियों में कूटनीति ही वह रास्ता है जो टकराव को बातचीत में बदल सकता है। यदि वैश्विक शक्तियां संयम और संवाद को प्राथमिकता दें, तो शांति और स्थिरता की उम्मीद अभी भी कायम है।






