जंगीपुर हिंसा, रामनवमी के दौरान झड़प, सीपीआई(एम) नेताओं का दौरा, प्रशासन पर सवाल और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की पूरी रिपोर्ट।
जंगीपुर : रामनवमी पर तनाव, राजनीति तेज—जिम्मेदारी किसकी?
कलम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
मुर्शिदाबाद / जंगीपुर | 28 मार्च 2026
जंगीपुर हिंसा के बाद मुर्शिदाबाद जिले का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। शनिवार को सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेताओं ने अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की और हालात का जायजा लिया। इस दौरान प्रशासन की भूमिका को लेकर भी तीखी आलोचना सामने आई।
सीपीआई(एम) के जिला सचिव जमीर मोल्ला, राज्य कमेटी सदस्य सोमनाथ सिंह, पूर्व सांसद बदरुद्दोजा खान और वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद कांडारी जंगीपुर अस्पताल पहुंचे। इससे पहले शुक्रवार रात को ही सोमनाथ सिंहराय अस्पताल पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण कर चुके थे।
अस्पताल से बाहर निकलकर मीडिया से बात करते हुए जमीर मोल्ला ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बार-बार होना प्रशासन की विफलता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि रामनवमी पहले भी पश्चिम बंगाल में मनाई जाती थी, लेकिन तब इस तरह की हिंसा नहीं होती थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले के शासन में दंगे नहीं होने दिए जाते थे, जबकि अब बार-बार तनाव की स्थिति बन रही है। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
शुक्रवार को रामनवमी के दौरान मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज के फुलतला मोड़ इलाके में दो समूहों के बीच टकराव हो गया। दिनभर क्षेत्र में तनाव बना रहा और हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले से उचित सुरक्षा व्यवस्था की जाती, तो इस घटना को टाला जा सकता था।
इधर, रानीगंज में एक चुनावी सभा के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री মমতা ব্যানার্জি ने इस घटना के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अधिकारियों के तबादले को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि रामनवमी सभी मनाते हैं, लेकिन हर कोई दंगा नहीं करता। उनके इस बयान पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
यह घटना अकेली नहीं है। राज्य के कई हिस्सों में इस तरह की झड़पें पहले भी सामने आ चुकी हैं। वामपंथी दलों का आरोप है कि धार्मिक आयोजनों का इस्तेमाल समाज में ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।
उनका कहना है कि प्रशासन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करता, जिससे ऐसी घटनाएं दोहराई जाती हैं।
जंगीपुर हिंसा को लेकर जमीर मोल्ला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह घटना योजनाबद्ध लगती है और प्रशासन की मौजूदगी में हुई, जो बेहद निंदनीय है।
उन्होंने मांग की कि जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों—एसपी, एसडीपीओ और थाना प्रभारी—को तुरंत हटाया जाए। उनके मुताबिक प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभाई।
सीपीआई(एम) के नेताओं ने अस्पताल के अलावा प्रभावित क्षेत्रों का भी दौरा किया और स्थानीय लोगों से बातचीत की। लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल देखा गया।
कई लोगों ने मांग की कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कदम उठाए जाएं।
जंगीपुर हिंसा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
असल मुद्दा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं हैं, जो प्रशासन और व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।






