ईरान हमला पर मानवाधिकार कार्यकर्ता शमीम अहमद का बयान, ईरान में लड़कियों के स्कूल पर हमले में 165 से अधिक बच्चियों की मौत को मानवता के लिए शर्मनाक त्रासदी बताया।
क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता, 15 मार्च 2026
ईरान हमला: युद्ध की राजनीति और मानवता पर हमला

ईरान हमला को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता, ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन (HRPA) के नेशनल प्रेसिडेंट और इंटरनेशनल कन्वीनर शमीम अहमद ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर जारी हमलों और बढ़ते युद्ध हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों, वैश्विक शांति और मानवीय गरिमा के खिलाफ एक गंभीर अपराध है।
शमीम अहमद ने अपने बयान में विशेष रूप से ईरान हमला के दौरान एक लड़कियों के स्कूल को निशाना बनाकर किए गए हमले को अत्यंत दर्दनाक और अमानवीय घटना बताया। इस हमले में 165 से अधिक मासूम बच्चियों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यह घटना आधुनिक और विकसित कहलाने वाली दुनिया के विवेक पर ऐसा काला धब्बा है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
बच्चियों के स्कूल पर हमला: इंसानियत को झकझोर देने वाला अपराध

उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध में बच्चों, महिलाओं और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों और सभ्य मूल्यों की खुली अवहेलना है। स्कूलों पर हमला दरअसल भविष्य पर हमला है, क्योंकि शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चे ही किसी समाज की उम्मीद और विकास का आधार होते हैं। ऐसे हमले पूरी मानवता को झकझोर देते हैं और सभ्य होने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान आम इंसान को

शमीम अहमद ने कहा कि वर्तमान युद्ध स्थिति का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है। बमबारी और मिसाइल हमलों में हजारों निर्दोष लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, जबकि लाखों लोग भय, असुरक्षा और बेघर होने की त्रासदी झेलने को मजबूर हैं। युद्ध में अस्पताल, स्कूल, घर और बुनियादी ढांचे तबाह हो जाते हैं, जिसके कारण गंभीर मानवीय संकट पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकार के दृष्टिकोण से युद्ध जीवन के अधिकार, स्वतंत्रता, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है। बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, महिलाएं असुरक्षा का शिकार होती हैं और समाज में भय व अस्थिरता का माहौल पैदा हो जाता है।
तेल और हथियार की राजनीति: युद्ध के पीछे छिपे हित

शमीम अहमद ने यह भी कहा कि दुनिया में होने वाले कई युद्धों के पीछे हथियारों का वैश्विक व्यापार और तेल की राजनीति भी एक बड़ा कारण है। जब हथियार बनाने वाले देशों में उत्पादन बढ़ जाता है तो उन्हें बेचने या इस्तेमाल करने के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव और संघर्ष पैदा किए जाते हैं। इस तरह युद्ध दरअसल इंसानियत के खून की कीमत पर हथियारों की मंडी को जिंदा रखने का जरिया बन जाता है।
मानवाधिकारों के लिए शमीम अहमद की लगातार लड़ाई
शमीम अहमद कई वर्षों से मानवाधिकारों की रक्षा और वंचित वर्गों की आवाज उठाने के लिए सक्रिय हैं। उन्होंने HRPA के मंच से विभिन्न क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ मजबूत आवाज उठाई है और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अनेक अभियान चलाए हैं। उनकी अगुवाई में संगठन ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानव गरिमा, समानता और न्याय के मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप की मांग

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे तत्काल इस युद्ध को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं और मासूम नागरिकों, खासकर बच्चों के खिलाफ होने वाले हमलों की कड़ी निंदा करें।
अंत में शमीम अहमद ने कहा कि यदि दुनिया सचमुच खुद को सभ्य और विकसित कहती है तो उसे मानवता के खिलाफ हो रहे इन अत्याचारों पर चुप नहीं रहना चाहिए। मानवता की रक्षा के लिए दुनिया को युद्ध और शक्ति की राजनीति से ऊपर उठकर शांति, न्याय और मानवाधिकारों के लिए एकजुट होना होगा।






