गिरफ्तारी अभियान को लेकर चुनाव आयोग सख्त, 10 दिन में गैर-जमानती वारंट पर कार्रवाई का आदेश, पुलिस और प्रशासन पर कड़ी निगरानी।
कलम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता 27 मार्च 2026
गिरफ्तारी अभियान को तेज करने के लिए चुनाव आयोग ने राज्य की पुलिस व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि जिन आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हैं, उन्हें हर हाल में 10 दिनों के भीतर गिरफ्तार किया जाए। साथ ही, चुनाव के दौरान सभी सरकारी कर्मचारी आयोग के अधीन रहेंगे और उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
चुनाव आयोग ने राज्य के पुलिस अधीक्षक, पुलिस आयुक्त और जिला चुनाव अधिकारियों को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले चुनावों के दौरान दर्ज हुए आपराधिक मामलों की जांच जल्द पूरी कर चार्जशीट या अंतिम रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
पुराने मामलों का जल्द निपटारा
आयोग ने निर्देश दिया है कि पिछली चुनाव प्रक्रिया के दौरान दर्ज सभी आपराधिक मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अपराधियों पर समय रहते कार्रवाई हो और चुनावी माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।
गिरफ्तारी अभियान को प्रभावी बनाने के लिए एसडीपीओ स्तर के अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें सभी फरार अपराधियों और घोषित अपराधियों की सूची तैयार करनी होगी। इनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने और जरूरत पड़ने पर लुकआउट सर्कुलर जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, पड़ोसी जिलों और महकमों के साथ नियमित समन्वय बैठक भी अनिवार्य की गई है।
थाना प्रभारी (ओसी/एसएचओ) को अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील और अशांत इलाकों की पहचान करनी होगी। इसके अलावा, उन असामाजिक तत्वों को भी चिन्हित करना होगा जो पिछले चुनावों में हिंसा या अपराध में शामिल थे। आयोग ने इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने को कहा है।
चुनाव आयोग ने दोहराया है कि मतदान के दौरान सभी सरकारी कर्मचारी उसके नियंत्रण में कार्य करते हैं। ऐसे में यदि कोई अधिकारी अपने कर्तव्य में लापरवाही करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आयोग ने थानों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सभी गैर-जमानती वारंट का 10 दिन के भीतर निष्पादन
- फरार आरोपियों की सूची बनाकर कार्रवाई
- चुनाव के दौरान शांति बनाए रखने के लिए अग्रिम कदम
- राजनीतिक टकराव वाले क्षेत्रों की पहचान
- उम्मीदवारों की रैलियों और सभाओं में सुरक्षा व्यवस्था
- होटल, लॉज और धर्मशालाओं की नियमित जांच
- नाका चेकिंग को 24 घंटे सक्रिय रखना
- सीसीटीवी निगरानी और वाहन जांच को मजबूत करना
- अपराध और मादक पदार्थ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष गश्त
चुनाव आयोग का यह सख्त रुख साफ संकेत देता है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।






