CAA विवाद फिर तेज़, बांग्लादेश से आए 12 हिंदू परिवारों को नागरिकता मिलने पर आलोचकों ने कानून को भेदभावपूर्ण और संविधान विरोधी बताया।
By Qalam Times News Network | नई दिल्ली | 02 दिसम्बर 2025
CAA विवाद :नागरिकता मिली, लेकिन बहस का तूफ़ान फिर तेज़
बांग्लादेश से आए 12 हिंदू शरणार्थी परिवारों को CAA के तहत भारतीय नागरिकता दे दी गई है। सरकार इसे एक बड़ी राहत और “मानवीय कदम” बताती है। लेकिन दूसरी तरफ, CAA विवाद को लेकर उठे सवाल पहले से ज्यादा तीखे हो गए हैं। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला कुछ लोगों की मदद तो करता है, लेकिन देश के संवैधानिक सिद्धांतों, सामाजिक संतुलन और धार्मिक समानता पर लंबी छाया डाल देता है।
CAA की सबसे बड़ी आलोचना यही है कि यह नागरिकता को धर्म से जोड़ देता है। कई मानवाधिकार समूह, मुस्लिम संगठन और संवैधानिक विशेषज्ञ साफ कहते हैं— “जब किसी कानून में मुसलमानों को ही बाहर रखा जाए, तो यह बराबरी के अधिकार को चोट पहुँचाता है।” आलोचकों के अनुसार यह कदम उन समुदायों को दूसरी श्रेणी के नागरिक में बदल देने की ओर ले जा सकता है, जो खुद को पहले ही असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका
राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि यह कानून समाज में धार्मिक विभाजन की रेखाएँ और गहरी कर सकता है। गैर–मुस्लिम शरणार्थियों को राहत मिलने के साथ ही, मुस्लिम समुदाय में यह चिंता भी बढ़ी है कि क्या भविष्य में उनका दर्जा कमजोर किया जा सकता है। CAA को लागू करना सिर्फ कानूनी कदम नहीं, बल्कि भारत की सामाजिक एकता और विश्वास पर सीधा असर डालने वाला फैसला माना जा रहा है।
एक और आपत्ति यह है कि CAA सिर्फ चुनिंदा धर्मों को शामिल करता है।जबकि कई ऐसे समुदाय—जैसे श्रीलंका के तमिल, म्यांमार के रोहिंग्या, या अफ़्रीकी देशों से आए शरणार्थी—राजनीतिक, जातीय या भाषा आधारित हिंसा से भागकर भारत आते हैं। लेकिन कानून उन्हें किसी भी श्रेणी में नहीं रखता। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उद्देश्य “पीड़ितों की मदद” है, तो सूची इतनी संकीर्ण क्यों?
राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप
विपक्ष यह भी कह रहा है कि CAA एक तरह की राजनीतिक रणनीति है— कुछ खास धार्मिक समूहों को केंद्र में रखकर वोट बैंक मजबूत करने का तरीका।बीजेपी द्वारा सीमाई जिलों में बनाए गए कैंपों और हेल्प डेस्कों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सहायता सच में मानवीय है या चुनावी तैयारी का हिस्सा।

इन 12 परिवारों के लिए नागरिकता का प्रमाण–पत्र राहत और सम्मान लेकर आया है। उन्होंने बरसों तक पहचान, दस्तावेज़ और सुरक्षा की लड़ाई लड़ी थी। उनकी खुशी समझी जा सकती है।लेकिन देश के एक बड़े हिस्से के लिए यह कदम चिंता का कारण है। मुस्लिम समुदाय विशेष रूप से बेचैन है, क्योंकि वे इसे अपने भविष्य के लिए एक चेतावनी की तरह देख रहे हैं।
CAA ने मदद कुछ को दी है, लेकिन बेचैनी बहुतों में बढ़ाई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अभी खत्म नहीं होगा, क्योंकि मामला सिर्फ नागरिकता का नहीं—बल्कि भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र, सामाजिक विश्वास और संवैधानिक बराबरी का है। और यही वजह है कि CAA विवाद आज भी उतना ही संवेदनशील है जितना इसके लागू होते समय था।






