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बिहार को चाहिए पुनर्निर्माण, न कि पलायन भाजपा-जेडीयू सरकार ने दो दशकों में बिहार के उद्योगों को किया कमज़ोर: जयराम रमेश

बिहार को चाहिए पुनर्निर्माण, न कि पलायन। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भाजपा-जेडीयू सरकार पर दो दशकों में बिहार के उद्योगों को बर्बाद करने का आरोप लगाया और कांग्रेस के औद्योगिक सुनहरे दौर को याद दिलाया।

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
Patna, 3 नवंबर 2025

पुनर्निर्माण—यही वह शब्द है जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने बिहार के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने साफ कहा कि बिहार को अब पलायन नहीं, पुनर्निर्माण चाहिए। अपने हालिया ट्वीट में रमेश ने भाजपा-जेडीयू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों के शासन में इन दोनों दलों ने बिहार की औद्योगिक रीढ़ तोड़ दी है।

पुनर्निर्माण

रमेश ने कहा कि कभी चीनी, जूट, पेपर, सिल्क और डेयरी उद्योगों के लिए प्रसिद्ध यह राज्य अब बेरोज़गारी और पलायन का प्रतीक बन चुका है। भाजपा-जेडीयू की सरकार ने बिहार में कोई नया उद्योग नहीं लगाया, बल्कि कांग्रेस के शासनकाल में स्थापित उद्योगों को भी बर्बाद होने दिया। उन्होंने कहा कि आज समय आ गया है कि बिहार अपने औद्योगिक  के लिए खड़ा हो।

कांग्रेस का औद्योगिक सुनहरा दौर

जयराम रमेश ने याद दिलाया कि कांग्रेस के शासनकाल में आज़ादी के बाद बिहार को औद्योगिक नक्शे पर मजबूती से स्थापित किया गया था।
कांग्रेस सरकारों ने एक के बाद एक बड़े औद्योगिक केंद्र स्थापित किए—

  • बरौनी तेल शोधन कारखाना: जिसने बिहार को ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बनाया।
  • सिंदरी और बरौनी खाद कारखाने: देश की खाद सुरक्षा में अहम योगदान दिया।
  • बरौनी डेयरी: आज की “सुधा डेयरी” की नींव रखी।
  • रेल पहिया कारखाना (बेला) और डीज़ल लोकोमोटिव कारखाना (मढ़ौरा): बिहार को औद्योगिक पहचान दी।
  • नवीनगर थर्मल प्रोजेक्ट और सुधा कोऑपरेटिव नेटवर्क: ऊर्जा और डेयरी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मिसाल बने।

रमेश ने कहा कि उस दौर में बिहार का विकास पहिया तेज़ी से घूम रहा था, क्योंकि तब राजनीति नहीं, विज़न काम कर रहा था।

भाजपा-जेडीयू के शासन में उद्योगों का पतन

कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा-जेडीयू सरकार ने पिछले दो दशकों में न केवल नए उद्योग लगाने में असफलता दिखाई, बल्कि मौजूदा उद्योगों को भी बंद करवा दिया।

पुनर्निर्माण

  • अशोक पेपर मिल, 400 एकड़ का विशाल परिसर, आज खंडहर बन चुका है।
  • बिहार की 33 से अधिक चीनी मिलें, जिनका कभी देश के कुल उत्पादन में 40% हिस्सा था, आज या तो बंद हैं या कबाड़ में बिक चुकी हैं—सकरी, रैयम, लोहट, मोतीपुर, बनमनखी, मोतिहारी जैसी फैक्ट्रियां अब इतिहास हैं।
  • समस्तीपुर की रामेश्वर जूट मिल 2017 से बंद है।
  • भागलपुर का सिल्क उद्योग दम तोड़ रहा है; स्पन सिल्क फैक्ट्री वर्षों से ठप पड़ी है और 95% बुनकर परिवार गरीबी में डूबे हैं।

पुनर्निर्माण

रमेश ने व्यंग्य करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री कहते हैं—बड़ा उद्योग समुद्र किनारे लगता है। लेकिन सवाल ये है कि जब कांग्रेस ने बिना समुद्र के ही बरौनी, सिंदरी और बोकारो जैसे भारी उद्योग स्थापित कर दिए, तो आज ये असंभव कैसे हो गया?”

कांग्रेस के सवाल भाजपा-जेडीयू से

  1. जब कांग्रेस ने बिना समुद्र के बिहार में भारी उद्योग लगाए, तो आज उद्योग लगाना असंभव क्यों बताया जा रहा है?
  2. क्या यह सच नहीं कि 20 वर्षों में बिहार को उद्योगहीन कर दिया गया और केवल पलायन आधारित अर्थव्यवस्था बची है?
  3. क्या भाजपा-जेडीयू की नीतियों से ही किसान, मजदूर और युवा रोज़गार से वंचित नहीं हुए?

कांग्रेस का वादा: बिहार का पुनर्निर्माण

कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह बिहार में फिर से औद्योगिक पुनर्निर्माण की परंपरा शुरू करेगी—
जहां रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक अवसर एक बार फिर बिहार की पहचान बनेंगे।

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