भारत रत्न को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज, नीतीश कुमार के नाम पर केसी त्यागी की चिट्ठी से जेडीयू ने बनाई दूरी, एनडीए सहयोगियों और तेज प्रताप यादव के बयानों से बढ़ा सस्पेंस।
नई दिल्ली | 11 जनवरी 2026
क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
भारत रत्न : केसी त्यागी के पत्र से शुरू हुआ सम्मान का मुद्दा, जेडीयू ने झाड़ा पल्ला, सहयोगी दलों और विपक्ष से मिले मिले-जुले संकेत
भारत रत्न को लेकर बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने की मांग सामने आते ही सत्तारूढ़ जेडीयू ने खुद को इस प्रस्ताव से अलग कर लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र ने जहां राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, वहीं जेडीयू नेतृत्व ने इसे त्यागी की निजी राय बताकर साफ इनकार कर दिया कि यह पार्टी की आधिकारिक सोच नहीं है।
जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत रत्न की मांग पार्टी की विचारधारा या निर्णय का हिस्सा नहीं है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि केसी त्यागी फिलहाल पार्टी के किसी पद पर हैं या नहीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। यह बयान इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि त्यागी लंबे समय तक जेडीयू के राष्ट्रीय चेहरा रहे हैं और राज्यसभा सांसद से लेकर पार्टी अध्यक्ष तक की भूमिका निभा चुके हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एनडीए के भीतर असहजता बढ़ा दी है। त्यागी के पत्र के सार्वजनिक होने के बाद एनडीए के सहयोगी दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने का समर्थन किया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी नीतीश कुमार के दो दशकों के शासन को बिहार के विकास से जोड़ते हुए उन्हें इस सम्मान का योग्य बताया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे पुरस्कार मांग के आधार पर नहीं, बल्कि तय प्रक्रिया से दिए जाते हैं।

बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और एलजेपी (आरवी) के कुछ विधायकों ने भी नीतीश कुमार की भूमिका को “दुर्लभ और विशिष्ट” बताते हुए इस मांग का समर्थन किया। दिलचस्प बात यह रही कि लंबे समय से नीतीश के आलोचक रहे चिराग पासवान की ओर से आई यह तारीफ राजनीतिक रूप से असामान्य मानी जा रही है।
इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने इस बहस को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार को भारत रत्न दिया जाता है, तो उनके पिता लालू प्रसाद यादव को भी यह सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि दोनों नेताओं का सामाजिक न्याय और बिहार की राजनीति में संयुक्त योगदान रहा है। हालांकि आरजेडी या तेजस्वी यादव ने इस मांग का आधिकारिक समर्थन नहीं किया।
कुल मिलाकर, नीतीश कुमार के नाम पर शुरू हुई भारत रत्न की चर्चा ने बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर सहयोगी दल समर्थन जता रहे हैं, वहीं खुद नीतीश की पार्टी का इस मांग से दूरी बनाना कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है।






