बांग्लादेश के हालिया चुनाव में लोकतंत्र की मजबूती दिखी—बीएनपी की बढ़त, जमात-ए-इस्लामी की वापसी, सुधारों परजनमत और शांतिपूर्ण प्रक्रिया ने राजनीतिक परिपक्वता का संकेत दिया।
जनादेश, सुधारों का समर्थन और शांतिपूर्ण स्वीकृति ने बांग्लादेश में लोकतंत्र की परिपक्वता को नई दिशा दी।
Qalam Times News Network
Kolkata | 15 February 2026
लोकतंत्र का असली अर्थ सिर्फ मतदान नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वास और जनस्वीकृति है। बांग्लादेश के हालिया आम चुनाव ने यही संकेत दिया कि यह प्रक्रिया केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक व्यापक संस्थागत क्षण बन गई। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें दिखीं, जो यह बताती हैं कि मतदाता उदासीन नहीं बल्कि सजग और सक्रिय थे। अनुमानित 60 से 65 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत तक पहुंचा—जो राजनीतिक जागरूकता और चुनावी प्रक्रिया में भरोसे का संकेत है।

प्रारंभिक नतीजों के अनुसार Bangladesh Nationalist Party (BNP) स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है, लगभग 212 सीटों के साथ। इस बीच Jamaat-e-Islami Bangladesh ने करीब 70 सीटें हासिल कर खुद को एक मजबूत और संगठित विपक्ष के रूप में स्थापित किया है। यह आंकड़े केवल गणित नहीं हैं; इनके बीच लोकतंत्र की प्रतिस्पर्धी ऊर्जा और सत्ता संतुलन का नया अध्याय छिपा है। संसद अब एकतरफा नहीं, बल्कि बहस और जवाबदेही का मंच बनने की स्थिति में है।
जनमत और संरचनात्मक सुधार
संसदीय चुनाव के साथ हुए जनमत संग्रह में भी 60 प्रतिशत से अधिक समर्थन बताया जा रहा है। प्रस्तावित सुधारों में कार्यवाहक सरकार की व्यवस्था, शक्तियों का संतुलन, स्वतंत्र चुनाव आयोग और कार्यकाल की सीमाएं शामिल हैं। यदि इन प्रावधानों को ईमानदारी से लागू किया गया, तो शासन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परंपरा स्थापित हो सकती है। इसका अर्थ है कि मतदाता केवल प्रतिनिधि नहीं चुन रहे थे, बल्कि व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का समर्थन भी कर रहे थे।
विवादों की अनुपस्थिति, स्वीकृति की संस्कृति
इस चुनाव की एक उल्लेखनीय बात बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों का अभाव रहा। किसी प्रमुख दल ने संगठित गड़बड़ी का औपचारिक आरोप नहीं लगाया। सेना की तटस्थ भूमिका और चुनाव आयोग की पारदर्शिता को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया। दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्र में, जहां चुनाव बाद तनाव सामान्य बात है, यह स्वीकृति अपने आप में एक उपलब्धि मानी जा रही है।
जमात-ए-इस्लामी की वापसी
Jamaat-e-Islami Bangladesh के लिए यह परिणाम खास महत्व रखता है। वर्षों तक कानूनी चुनौतियों, प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव का सामना करने के बाद 70 सीटों की वापसी केवल चुनावी उपलब्धि नहीं, बल्कि संगठनात्मक पुनर्निर्माण का संकेत है। पार्टी ने परिणामों को स्वीकार करते हुए रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की बात कही है। न तो सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए, न ही जनादेश को अस्वीकार करने का रुख अपनाया गया—यह रुख संस्थागत स्थिरता को मजबूत करता है।
बीएनपी के सामने जिम्मेदारी
दूसरी ओर, Bangladesh Nationalist Party (BNP) के सामने अब बड़ी जिम्मेदारी है। बहुमत सत्ता देता है, लेकिन परीक्षा भी लेता है। नेतृत्व ने पारदर्शिता, विकास और न्याय का वादा किया है। हालांकि असली कसौटी होगी—जनमत संग्रह में समर्थित सुधारों को लागू करना, संस्थानों की स्वतंत्रता बनाए रखना और राजनीतिक संतुलन कायम रखना। यह तय करेगा कि यह चुनाव स्थायी लोकतांत्रिक मजबूती बनेगा या केवल सत्ता का एक और चक्र।
मतदाता का संदेश
सबसे महत्वपूर्ण संदेश मतदाताओं की परिपक्वता में छिपा है। मतभेदों के बीच सहिष्णुता, भावनाओं के बीच अनुशासन और जीत-हार दोनों को स्वीकार करने की गरिमा—यही लोकतांत्रिक संस्कृति की पहचान है। राजनीति यदि एक लंबी टेस्ट मैच है, तो यह चुनाव उसका एक अहम सत्र था। असली चुनौती आगे है—विश्वास को बनाए रखना और संस्थागत सुधारों को जमीन पर उतारना।
मतगणना पूरी हो चुकी है। अब शुरुआत उस कठिन चरण की है, जिसमें विश्वास को टिकाऊ व्यवस्था में बदलना होगा।






