अलापन बंद्योपाध्याय को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, रिव्यू याचिका खारिज। जानिए पूरा मामला, स्थानांतरण आदेश और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी ताजा अपडेट।
अलापन :मामला स्थानांतरण के पुराने आदेश पर पुनर्विचार से अदालत का इनकार, कहा—याचिका में कोई ठोस आधार नहीं
नई दिल्ली | 19 फरवरी 2026
क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अलापन बंद्योपाध्याय को दिल्ली हाई कोर्ट से एक और कानूनी झटका लगा है। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। यह याचिका उस आदेश के खिलाफ थी, जिसके तहत उनके खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही से जुड़ा मामला कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि रिव्यू पिटीशन में ऐसा कोई आधार नहीं है, जिस पर दोबारा सुनवाई की जरूरत पड़े।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह शामिल थे, ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि याचिका में कोई मेरिट नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि अलापन बंद्योपाध्याय द्वारा उठाए गए तर्कों में ऐसी कोई स्पष्ट कानूनी त्रुटि नहीं दिखाई देती, जो पहले दिए गए फैसले की समीक्षा का आधार बन सके।

इससे पहले 7 मार्च 2022 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने उनकी मूल याचिका को भी खारिज कर दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि मामला दिल्ली स्थानांतरित करने का आदेश विधि के दायरे में दिया गया है, क्योंकि अनुशासनात्मक और जांच संबंधी कार्रवाई की जड़ें नई दिल्ली से जुड़ी थीं। इसलिए कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर में कोई कानूनी खामी नहीं पाई गई।
अपनी रिव्यू याचिका में अलापन ने दावा किया था कि पिछली सुनवाई के दौरान उन्हें पर्याप्त रूप से अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया और फैसला सुरक्षित रखने से पहले उनकी दलीलों पर पूरी तरह विचार नहीं हुआ। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दावों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि पहले के आदेश में किसी प्रकार की स्पष्ट त्रुटि सामने नहीं आई है।
मामले की पृष्ठभूमि 28 मई 2021 की उस घटना से जुड़ी है, जब चक्रवात ‘यास’ से हुए नुकसान की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक बुलाई गई थी। यह बैठक कलाइकुंडा वायुसेना स्टेशन पर आयोजित हुई थी। आरोप है कि उस समय पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव होते हुए भी अलापन बंद्योपाध्याय बैठक में उपस्थित नहीं हुए। इसी के बाद केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की।
पहले उन्होंने कोलकाता स्थित केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की बेंच में इस कार्रवाई को चुनौती दी थी। लेकिन केंद्र सरकार ने मामले को दिल्ली की प्रधान बेंच में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। 22 अक्टूबर 2021 को कैट की प्रधान बेंच ने यह मांग स्वीकार कर ली और मामला दिल्ली भेज दिया गया।
इसके बाद 29 अक्टूबर 2021 को कोलकाता हाई कोर्ट ने स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया था। मगर 6 जनवरी 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और अलापन को संबंधित उच्च न्यायालय में स्थानांतरण आदेश को चुनौती देने की स्वतंत्रता दी। इसी के तहत उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार द्वारा उन्हें तत्काल कार्यमुक्त नहीं किए जाने के कारण, अलापन बंद्योपाध्याय ने 31 मई 2021 को अपने विस्तारित कार्यकाल से पहले ही सेवानिवृत्ति ले ली थी। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक प्रक्रिया को लेकर कानूनी संघर्ष जारी है।
ताजा फैसले के बाद अब दिल्ली में कैट के समक्ष चल रही कार्यवाही का रास्ता और साफ हो गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि रिव्यू याचिका खारिज होने से अब मामले की सुनवाई में कोई बड़ी बाधा नहीं रह गई है।






