अवैध घुसपैठिए पर RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान से देश में विवाद, बंगाली भाषी मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और नफरत बढ़ने की आशंका।
क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई | 9 फरवरी 2026
अवैध: RSS प्रमुख ने नागरिकों से पुलिस को सूचना देने की अपील की
अवैध घुसपैठिए के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। मुंबई में RSS के शताब्दी समारोह के दौरान संबोधन में भागवत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के विदेशी होने पर संदेह हो तो आम नागरिकों को पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि “उनकी भाषा ही उन्हें पहचानने के लिए काफ़ी होती है”, हालांकि उन्होंने किसी विशेष भाषा का नाम नहीं लिया।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि सरकार अवैध घुसपैठिए से जुड़े मामलों पर काम कर रही है, लेकिन समाज को भी सतर्क रहने की ज़रूरत है। उनके अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को लेकर शक हो तो पुलिस को सूचना देना नागरिकों की जिम्मेदारी है, ताकि प्रशासन जांच कर सके और ऐसे लोगों पर नजर रखी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध घुसपैठिए की पहचान और उन्हें देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया “धीरे-धीरे शुरू हो चुकी है” और आने वाले समय में इसमें तेजी आएगी।
मोहन भागवत ने जनगणना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे सरकारी अभियानों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन प्रक्रियाओं के दौरान कई ऐसे लोग सामने आते हैं जो भारतीय नागरिक नहीं होते। उनके अनुसार, ऐसे लोगों को स्वतः ही सूची से बाहर कर दिया जाता है।
यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में बंगाली भाषी मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल तेज़ होता जा रहा है। कई राज्यों में हिंदुत्व समर्थित भीड़ द्वारा हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जहां पीड़ितों को “बांग्लादेशी” बताकर निशाना बनाया गया। इन घटनाओं में अब तक लगभग आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और आलोचकों का मानना है कि RSS प्रमुख की इस अपील से भीड़ हिंसा को और बढ़ावा मिल सकता है।
बीजेपी शासित कई राज्यों में पुलिस ने बंगाली भाषी मुसलमानों को हिरासत में लेकर उनसे भारतीय नागरिकता का प्रमाण मांगा है। असम के मुख्यमंत्री समेत कई भाजपा नेताओं द्वारा लगातार भड़काऊ और घृणास्पद भाषण दिए जा रहे हैं। कुछ मामलों में लोगों को कथित तौर पर जबरन बांग्लादेश भेज दिया गया, हालांकि बाद में भारतीय अधिकारियों द्वारा नागरिकता की पुष्टि होने पर कुछ लोग वापस लौटे।






