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शमीम अहमद ने गणतंत्र दिवस पर पूर्वी चंपारण में दिया एकता और मानवाधिकार का संदेश

शमीम अहमद ने 77वें गणतंत्र दिवस पर पूर्वी चंपारण में विशेष संदेश दिया।

क़लम टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
26 जनवरी 2026, पूर्वी चंपारण, बिहार

शमीम अहमद

शमीम अहमद ने पूर्वी चंपारण जिले में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित समारोहों में भाग लेकर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन (HRPA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय संयोजक शमीम अहमद आयोजित गणतंत्र दिवस की विशेष तकरीब में अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा HRPA ने भी अपना स्वतंत्र कार्यक्रम आयोजित किया, जहां शमीम अहमद ने राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया।पूर्वी चंपारण के चकिया अनुमंडल में आयोजित गणतंत्र दिवस की भव्य तकरीब में शमीम अहमद साहब अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (DSP) सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में शमीम अहमद की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ी और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना की गई।

गणतंत्र दिवस संविधान की स्थापना का पर्व : शमीम अहमद

26 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया है। सन 1950 में इसी दिन हमारा संविधान प्रभावी हुआ था, जिसने भारत को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। शमीम अहमद ने अपने उद्बोधन में इस ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किया गया भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत और व्यापक लिखित संविधान माना जाता है। इसमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के आदर्शों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है

शमीम अहमद की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा में वृद्धि हुई और उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया। प्रशासन द्वारा उन्हें मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।प्र

शासन के समारोह के अतिरिक्त, ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने अपना विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया। इस कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

इस अवसर पर शमीम अहमद ने संगठन के सदस्यों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, “आज का दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों ने किस प्रकार अपने बलिदान से इस देश को आजादी दिलाई और हमें एक मजबूत संवैधानिक ढांचा प्रदान किया। हमारी जिम्मेदारी है कि हम लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें और समाज के हर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहें।”

अपने सारगर्भित संबोधन में शमीम अहमद ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

संवैधानिक मूल्यों का सम्मान: उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाने का दिन है। हर नागरिक को संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें अपने जीवन में उतारना चाहिए।

मानवाधिकारों की सुरक्षा: उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां मानवाधिकारों की कितनी सुरक्षा है। समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना हर नागरिक का दायित्व है।

राष्ट्रीय एकता का आह्वान: शमीम अहमद ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारा संविधान हमें सिखाता है कि हम सब समान हैं और हमें भाईचारे की भावना से रहना चाहिए। धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा की सीमाओं को पार करके ही हम एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।”

शमीम अहमद ने युवा पीढ़ी से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करें और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा, “युवा हमारे देश का भविष्य हैं। उन्हें शिक्षा, रोजगार और विकास के समान अवसर मिलने चाहिए। साथ ही, उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।”

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सामाजिक कुरीतियों, असमानता और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं और एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

मानवाधिकार के अग्रदूत: शमीम अहमद का योगदान

शमीम अहमद का नाम मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में अत्यंत सम्मानित है। HRPA के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने समाज के वंचित, पीड़ित और उपेक्षित वर्गों के लिए निरंतर कार्य किया है। महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण, सामाजिक न्याय और शैक्षणिक अधिकारों के लिए उनके प्रयास सराहनीय रहे हैं।

पूर्वी चंपारण में उनकी उपस्थिति से स्थानीय समुदाय में नवीन ऊर्जा का संचार हुआ। उपस्थित लोगों ने उनकी निस्वार्थ सेवा भावना और समर्पण की भूरि-भूरि सराहना की।

कार्यक्रमों के समापन पर राष्ट्रगान गाया गया और उपस्थित जनसमूह ने देश की प्रगति और समृद्धि के लिए संकल्प लिया। शमीम अहमद जैसे प्रतिबद्ध समाजसेवी की उपस्थिति ने इस गणतंत्र दिवस समारोह को विशेष बना दिया।

उनका यह संदेश आज भी प्रासंगिक है – “आइए, हम सभी मिलकर अपने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करें तथा एक उन्नत और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। जय हिन्द, जय भारत!”

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