क्लीनचिट मिलने के बाद लोकपाल ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप खारिज किए, शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की छूट दी।
क्लीनचिट : 134 पन्नों के आदेश में आरोपों को बताया बेबुनियाद, राजनीतिक दुर्भावना की भी की गई टिप्पणी
By Qalam Times News Network
नई दिल्ली | 14 जनवरी 2026
क्लीनचिट के साथ भारत की शीर्ष भ्रष्टाचार-रोधी संस्था लोकपाल ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को बड़ी राहत दी है। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में लोकपाल ने शिकायत को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि आरोप न तो ठोस सबूतों पर आधारित हैं और न ही जांच योग्य हैं। साथ ही, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि दुबे चाहें तो शिकायतकर्ता के खिलाफ प्राइवेसी या मानहानि के आधार पर अलग से कानूनी कदम उठा सकते हैं।

ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाले लोकपाल ने 134 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर सांसद के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का कोई विश्वसनीय प्रमाण पेश करने में असफल रहे। क्लीनचिट के इस फैसले में यह भी रेखांकित किया गया कि आरोप बार-बार बदले गए, लेकिन उनके समर्थन में ठोस तथ्य सामने नहीं आए। सोशल मीडिया पर आदेश के उन अंशों को खास तौर पर साझा किया जा रहा है, जिनमें शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई की अनुमति का उल्लेख है।
शिकायत क्या थी?
लखनऊ निवासी अमिताभ ठाकुर, जो आज़ाद अधिकार सेना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, ने मई 2025 में लोकपाल में शिकायत दर्ज कराई थी। पीटीआई के अनुसार, ठाकुर ने निशिकांत दुबे के 2009, 2014, 2019 और 2024 के चुनावी हलफनामों का हवाला देते हुए दावा किया था कि उनकी पत्नी अनामिका गौतम की संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई है, जो संदिग्ध है और इसकी जांच होनी चाहिए।
लोकपाल ने आदेश में कहा कि सांसद दुबे की पत्नी की संपत्ति में बढ़ोतरी मुख्य रूप से बाजार मूल्य में वृद्धि के कारण हुई है, न कि नई संपत्ति खरीदने से। दुबे की ओर से यह भी बताया गया कि उनकी पत्नी एक पेशेवर कंसल्टेंट हैं, नियमित रूप से आयकर रिटर्न दाखिल करती हैं और उनकी आय के स्रोत वैध हैं। लोकपाल ने इस पक्ष को स्वीकार करते हुए कहा कि अवैध आय का कोई प्रमाण सामने नहीं आया।
आदेश में यह भी कहा गया कि शिकायत राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होती है और इसमें व्यक्तिगत रंजिश की झलक मिलती है। लोकपाल ने यह दर्ज किया कि शिकायतकर्ता अलग-अलग मंचों पर सांसद के खिलाफ निराधार मामलों को आगे बढ़ा रहे थे।
एक सुनवाई से पहले अमिताभ ठाकुर ने लोकपाल से सुनवाई में शामिल होने के लिए आर्थिक सहायता या वैकल्पिक रूप से ऑनलाइन सुनवाई की अनुमति मांगी थी। लोकपाल ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया। इसके अलावा, शिकायत के विवरण सार्वजनिक करने को लेकर जारी शो-कॉज नोटिस को भी वापस ले लिया गया।
शिकायतकर्ता पर क्या असर पड़ेगा?
लोकपाल ने स्पष्ट किया कि वह खुद कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर रहा है, लेकिन निशिकांत दुबे को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे चाहें तो प्राइवेसी के उल्लंघन या मानहानि के आधार पर शिकायतकर्ता के खिलाफ अलग से कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
अमिताभ ठाकुर की मौजूदा स्थिति
अमिताभ ठाकुर इस समय उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला जेल में बंद हैं। उन्हें 10 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उन्होंने 1999 में देवरिया के एसपी रहते हुए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी पत्नी के नाम पर एक औद्योगिक प्लॉट हासिल किया। हाल ही में स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका कार्डियक इलाज हुआ। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और वे फिर से जेल में हैं। उनकी जमानत याचिका पर 17 जनवरी को सुनवाई होनी है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज है कि क्या क्लीनचिट के साथ शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, या मामला यहीं थम जाएगा।






