हवाई किराया पर कैप लगाने के अधिकार के बावजूद सरकार पूरे साल नियंत्रण क्यों नहीं करती? संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने त्योहारी मांग, डी-रेगुलेटेड बाज़ार और सरकारी हस्तक्षेप पर स्थिति स्पष्ट की।
By Qalam Times News Network
नई दिल्ली | 13 December, 2025
त्योहारी सीजन, डी-रेगुलेटेड बाज़ार और असाधारण हालात—केंद्र ने हवाई किराया नियंत्रण पर अपना पक्ष रखा
हवाई किराया लगातार आम यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रहा है, लेकिन केंद्र सरकार पूरे साल इस पर पाबंदी लगाने के मूड में नहीं है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने लोकसभा में साफ कहा कि सरकार के पास किराए पर कैप लगाने का अधिकार ज़रूर है, लेकिन इसे स्थायी तौर पर लागू करना व्यावहारिक नहीं है।

मंत्री ने कहा कि हवाई किराया विशेष रूप से त्योहारी मौसम, सीमित सीटों और कुछ खास रूट्स पर अचानक बढ़ी मांग की वजह से ऊपर जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र डी-रेगुलेटेड है और यही मॉडल लंबे समय में यात्रियों के हित में काम करता है। उनका कहना था कि मांग और आपूर्ति का संतुलन ही किराए को नियंत्रित करता है, न कि सालभर का सरकारी नियंत्रण।
हाई कोर्ट की नाराज़गी पर भी कायम रहा रुख
दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा हवाई टिकटों के 40 हज़ार रुपये तक पहुँचने पर जताई गई नाराज़गी के बावजूद सरकार ने अपने रुख में बदलाव के संकेत नहीं दिए। अदालत ने हाल ही में कहा था कि स्थिति बिगड़ने से पहले केंद्र सरकार ने प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया, जिसके चलते किराए बेकाबू हो गए।
इस पर मंत्री ने संसद में कहा कि त्योहारी सीजन में किराए में उतार-चढ़ाव मौसमी होते हैं। उन्होंने दोहराया कि किसी एक सेक्टर पर पूरे साल कैप लगाना न तो बाज़ार के लिए ठीक है और न ही एविएशन इंडस्ट्री की स्थिरता के लिए।
नियंत्रण क्यों नहीं? सरकार की दलील

हवाई किराया नियंत्रित करने की मांग से जुड़े एक निजी सदस्य विधेयक के जवाब में नायडू ने बताया कि डी-रेगुलेशन का मकसद सेक्टर का विस्तार करना था। उन्होंने कहा कि जिन देशों में एविएशन सेक्टर ने तेज़ी से तरक्की की है, वहां खुला बाज़ार ही अपनाया गया।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एयरलाइंस को खुली छूट नहीं दी गई है। मौजूदा एयरक्राफ्ट एक्ट केंद्र सरकार को असाधारण परिस्थितियों—जैसे महामारी, बड़े धार्मिक आयोजन, आतंकी हमले या गंभीर परिचालन संकट—में हस्तक्षेप का पूरा अधिकार देता है।
कब-कब सरकार ने दखल दिया
मंत्री ने बताया कि कोविड-19 संकट, महाकुंभ, पहलगाम आतंकी हमले और हालिया इंडिगो संकट के दौरान सरकार ने किराया स्लैब लागू कर हस्तक्षेप किया था, ताकि अवसरवादी मूल्य निर्धारण से यात्रियों को बचाया जा सके।
इसके अलावा ‘फेयर से फुरसत’ योजना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सभी एयरलाइंस के सहयोग से देश के 25 प्रमुख रूट्स पर किराए तय किए गए हैं।
मुद्रास्फीति के बावजूद किराया सस्ता? सरकार का दावा
आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि महंगाई को समायोजित करने के बाद भारत में वास्तविक हवाई किराए पिछले वर्षों में घटे हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार, भारत में वास्तविक किराए में 43% की गिरावट आई है, जो अमेरिका और चीन से भी अधिक है।
एयरलाइंस को क्या निर्देश
सरकार ने सभी एयरलाइंस को टैरिफ शीट जारी करने का निर्देश दिया है, जिसमें न्यूनतम और अधिकतम किराया स्पष्ट रूप से दर्शाया जाए। यह जानकारी टिकट बुकिंग वेबसाइट्स पर यात्रियों को साफ दिखाई देनी चाहिए।
लोकसभा में विपक्ष ने मौजूदा किराया बढ़ोतरी पर सवाल उठाए, लेकिन सरकार ने दोहराया कि लंबी अवधि में डी-रेगुलेटेड मॉडल ही सस्ती और अधिक उड़ानों का रास्ता खोलता है—और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप का अधिकार सरकार के पास सुरक्षित है।






