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अफवाह पर तमिलनाडु सरकार का विराम: तिरुपरंकुंद्रम मंदिर को दरगाह बनाया गया—दावा पूरी तरह गलत

अफवाह पर तमिलनाडु सरकार का फैक्ट-चेक: तिरुपरंकुंद्रम मंदिर को दरगाह में बदले जाने का दावा पूरी तरह गलत, ऐतिहासिक और स्थापत्य साक्ष्य बताते हैं कि यह मूल इस्लामी मकबरा है।

By Qalam Times News Network
नई दिल्ली  | 10 दिसम्बर 2025

अफवाह को आधार बनाकर फैलाया गया दावा बेबुनियाद

अफवाह से शुरू हुई वह वायरल वीडियो, जिसमें कहा गया था कि तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित एक हिंदू मंदिर को दरगाह में बदल दिया गया है, अब तमिलनाडु सरकार की फैक्ट-चेक टीम द्वारा स्पष्ट रूप से गलत साबित हो चुकी है। वीडियो में दिखाई देने वाला ढांचा दरअसल ‘सिकंदर दरगाह’ है—एक मूल इस्लामिक इमारत, जिसे द्रविड़ शैली की पारंपरिक शिल्पकला को अपनाकर बनाया गया था।

अफवाह

डिपार्टमेंट ऑफ म्यूज़ियम, तमिलनाडु द्वारा प्रकाशित पुस्तक Islamic Architecture in Tamil Nadu में बताया गया है कि सूबे में कई इस्लामिक ढाँचे स्थानीय द्रविड़ वास्तु–तत्वों जैसे स्तंभ, बीम और अलंकरण अपनाकर बनाए गए। यही वजह है कि कई दरगाहें और मस्जिदें पहली नज़र में मंदिर जैसी प्रतीत होती हैं, लेकिन वे शुरू से इस्लामी धार्मिक स्थल ही रहे हैं—न कि परिवर्तित मंदिर।

सरकारी फैक्ट-चेक इकाई ने इब्न बतूता का उल्लेख करते हुए कहा कि मदुरै सल्तनत के शासकों ने स्थानीय रीति-रिवाज अपनाए थे और उनके काल में मंदिरों को नुकसान पहुँचाने या मूर्तियों को तोड़ने जैसी कोई घटना दर्ज नहीं है।

सुल्तान अलाउद्दीन की कब्र मदुरै के गोरीपालयम क्षेत्र में बनाई गई थी। यह 14वीं शताब्दी का मकबरा है, जिसकी बनावट में पांड्य कालीन मंदिरों जैसी कई विशेषताएँ दिखाई देती हैं, परन्तु उसके गुंबद जैसे इस्लामी तत्व इसकी वास्तविक पहचान स्पष्ट करते हैं।

इमारत ऊँचे अधिष्ठान पर स्थित है, जिसके भीतर जाने के लिए सीढ़ियाँ बनाई गई हैं। बाहरी दीवारों पर पांड्य शैली की पिलास्टर्स उकेरी गई हैं, और चारों ओर बना प्राकार द्रविड़ शैली के स्तंभों पर टिका हुआ है। बाद में सामने एक हॉल जोड़ा गया जिसमें छोटे मीनार भी निर्मित किए गए—संभावतः 17वीं–18वीं शताब्दी में। इन सभी तत्वों से साबित होता है कि यह ढाँचा मूलतः एक मकबरा ही था, मंदिर नहीं।

सोशल मीडिया पर कई खातों द्वारा इस दावे को जोड़कर यह भी कहा जा रहा था कि “मुगलों ने तलवार के बल पर मंदिरों को मस्जिदों में बदला।” राज्य सरकार ने ऐसे पोस्टों को खतरनाक बताया और लोगों से अपील की कि अफवाह पर विश्वास न करें।

फैक्ट-चेक यूनिट ने दो टूक कहा—सांप्रदायिक नफ़रत न फैलाएँ। अफवाहों पर भरोसा न करें।”

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